गोडसे को दबोचने वाले सिपाही को मारने के लिए रची गई बड़ी साजिश
महात्मा गांधी की हत्या के बाद भाग रहे नाथुराम गोडसे को एक सिपाही ने पकड़ तो लिया, मगर बाद में उसके साथ क्या क्या हुआ, ये कोई नहीं जानता। गोडसे को पकड़ने वाला वो जांबाज सिपाही एक बड़ी साजिश का शिकार हो गया था। रिपोर्ट: अशोक केडियाल
गोडसे को दबोचने वाले सिपाही को मारने के लिए रची गई बड़ी साजिश
ये जांबाज सिपाही हिमाचल के नाहन का रहने वाला देवराज सिंह था। डीके सिंह के नाम से मशहूर देवराज ने 30 जनवरी 1948 की शाम को दिल्ली के बिरला मंदिर की प्रार्थना सभा में मौजूद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर गोली दागने वाले नाथूराम गोडसे को धर दबोचा था।
गोडसे को दबोचने वाले सिपाही को मारने के लिए रची गई बड़ी साजिश
परिवार के सदस्य बताते हैं कि उस दौरान देश के समाचार पत्रों में नाथूराम को पकड़ने की खबर चित्रों सहित प्रकाशित हुई थी, लेकिन इस ऐतिहासिक घटना के बाद देवराज सिंह के खिलाफ बड़ी साजिश रची जाने लगी थी।
गोडसे को दबोचने वाले सिपाही को मारने के लिए रची गई बड़ी साजिश
उन पर कई बार हमला भी किया गया। यही नहीं उन्हें मारने के लिए खाने में जहर तक खिलाया गया जिसके बाद वह गंभीर बीमार पड़ गए। 10 साल तक उनका अस्पताल में इलाज चला, लेकिन वह आम जीवन में नहीं लौट सके।
गोडसे को दबोचने वाले सिपाही को मारने के लिए रची गई बड़ी साजिश
बीमारी के चलते उन्हें इंडियन एयर फोर्स से 5 जनवरी 1955 को डिस्चार्ज कर दिया गया और उन्हें डिसएब्लिटी पेंशन के रूप में 115 रुपये दिए जाने लगे। उन्हें 15 अगस्त 1953 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने अशोक चक्र (द्वितीय श्रेणी) से सम्मानित किया था, लेकिन उन्हें इसके बाद पूरी जिंदगी परेशानी एवं बीमारी के जूझने में गुजारी।