बचपन में इस मैदान में चौक्के छक्कों की झड़ी लगाते थे ऋषि धवन
क्रिकेट कैरियर की बुलंदियों पर पहुंचे चुके हिमाचल के ऋषि धवन कभी गांव के उबड़-खाबड़ मैदानों में होने वाली छोटी-छोटी क्रिकेट ट्रॉफियों में भी टीम की जीत के लिए पूरा जोर लगाते थे। रिपोर्ट: भूपेंद्र राणा, फोटो: जय कुमार
बचपन में इस मैदान में चौक्के छक्कों की झड़ी लगाते थे ऋषि धवन
कड़ी मेहनत और बड़ों से आशीर्वाद लेना कभी नहीं भूलते हैं। मंडी के इस क्रिकेटर ने जिस दिन क्रिकेट का बल्ला थामा था, उसी दिन से उनका एक ही सपना था... एक दिन टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनना।
बचपन में इस मैदान में चौक्के छक्कों की झड़ी लगाते थे ऋषि धवन
पड्डल मैदान से क्रिकेट कैरियर की शुरूआत करने वाले धवन ने अपने गृह जिले का शायद ही ऐसा कोई मैदान छोड़ा हो, जहां उन्होंने क्रिकेट ने खेली हो। बचपन में धवन इस मैदान में चौके-छक्कों की झड़ी लगाते थे।
बचपन में इस मैदान में चौक्के छक्कों की झड़ी लगाते थे ऋषि धवन
धवन के साथी उस समय को नहीं भूलते हैं। जब एक फोन करने पर ही धवन झट से खेलने को तैयार हो जाते। उस दौरान उनके साथ क्रिकेट खेलने वाले मंडी के अंकुश वालिया कहते हैं कि गांव में होने वाली छोटी-छोटी क्रिकेट ट्रॉफियों के लिए जब टीम तैयार करते थे, तो धवन को बुलाना नहीं भूलते थे।
बचपन में इस मैदान में चौक्के छक्कों की झड़ी लगाते थे ऋषि धवन
मंडी जिले के बैहना, भड़याल, हटगढ़, गागल, बग्गी में धवन हर बार गांव की टीमों के लिए खेलते। आईपीएल और रणजी में प्रतिनिधित्व करने के बाद धवन आज भी गांव में होने वाली ट्रॉफियों में खेलने के लिए पहुंच जाते हैं। मंडी के पड्डल मैदान में होने वाली प्रतियोगिताओं में भी धवन अपनी पुरानी टीम के लिए खेलते हैं।