हिमाचल सरकार ने कैबिनेट बैठक में लॉकडाउन 4.0 में बड़ी रियायतें देने का फैसला लिया है। प्रदेश के भीतर एक जून से 60 फीसदी सवारियों को लेकर सभी सरकारी और निजी बसें चलेंगी। इसमें न तो कर्फ्यू पास की जरूरत है और न यात्री क्वारंटीन होंगे। सरकार बस किराया भी नहीं बढ़ाएगी। सरकारी और निजी बसों में सवारियां बिना मास्क के नहीं चढ़ पाएंगी। बस की सीट के पीछे सवारियों को कोरोना से बचाव की जानकारी मिलेगी। एक दरवाजे से लोग चढ़ेंगे और दूसरे से उतरेंगे। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कैबिनेट में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में शनिवार को होटल पीटरहाफ में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया कि बसें कंटेनमेंट जोन से होकर तो गुजरेंगी लेकिन वहां न सवारियां उतारी जाएंगी और न चढ़ाई जाएंगी। सोशल डिस्टेंसिंग के चलते 40 फीसदी सीटें खाली रहेंगी। रात्रि बस सेवा और डीलक्स बसें नहीं चलेंगी। हिमाचल में 33 सौ सरकारी और 3100 निजी बसें हैं। हिमाचल में रविवार या सोमवार से बिना पास के टैक्सी और ऑटो चलने शुरू हो जाएंगे। कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन को देखते हुए कैबिनेट ने हिमाचल में सभी स्कूल-कॉलेजों समेत अन्य शिक्षण संस्थानों को फिलहाल बंद रखने का फैसला लिया है।
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हिमाचल कैबिनेट बैठक
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, निजी स्कूल मार्च से लॉकडाउन जारी रहने तक सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले पाएंगे। ट्यूशन फीस भी बढ़ाकर नहीं, बल्कि पिछले साल की तय ही वसूलेंगे। ऐसा न किया तो यह अपराध होगा। इससे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले साढ़े पांच लाख विद्यार्थियों के करीब आठ लाख अभिभावकों को राहत मिली है।
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शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि निजी स्कूलों को ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने को कहा है। फीस न चुकाने की सूरत में किसी भी बच्चे की पढ़ाई नहीं रोकी जाएगी। निजी स्कूलों को शिक्षकों और गैर शिक्षकों को पूरा वेतन देने, किसी भी कर्मी को नौकरी से नहीं निकालने और वेतन में कमी न करने के निर्देश दिए हैं।
कैबिनेट की विशेष बैठक बुधवार को बुलाने पर भी फैसला लिया गया। इस बैठक में प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के बारे में अहम फै सले लिए जाएंगे। इस बैठक में मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिशें भी रखी जाएंगी। वहीं, कैबिनेट ने 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने का निर्णय लिया है। आयोग से अभी तक मिले अनुदानों में से 70 प्रतिशत ग्राम पंचायतों, 15 प्रतिशत पंचायत समितियों और 15 प्रतिशत जिला परिषदों को आवंटित किया जाएगा, जिससे वे विकास गतिविधियां शुरू कर सकें। पहले सारा पैसा पंचायतों में जाता था।