कैशलेस ट्रांजेक्शन के नाम पर आपको चूना लगाया जा रहा है। अगर यकीन नहीं है तो ये खबर पढ़ने के बाद पक्का हो जाएगा।कई दुकानदारों ने कैशलेस ट्रांजेक्शन को लूट-खसोट का जरिया बना लिया है। दुकानों में ग्राहक कैश की जगह कार्ड स्वैप करने के लिए देता है तो...
दुकानदार उससे बैंक के नाम पर दो फीसदी ज्यादा पैसे वसूल कर लेता है। बैंक के अधिकारी कहते हैं कि दुकानदार ग्राहकों की सुविधा के लिए स्वाइप मशीनें लगाता है। ऐसे में ग्राहक से ज्यादा वसूली करना गैरकानूनी है। नोटबंदी के बाद लोग सामान खरीदने जाते हैं तो कार्ड से दुकानदार को पेमेंट देना उचित समझते हैं।
लेकिन इसके बदले में दुकानदार कहते हैं कि एक्चुअल अमाउंट पर आपको दो फीसदी अतिरिक्त देना पड़ेगा। स्थानीय कमल, नवल, अजय, सारिका आदि ने बताया कि वे ज्यादातर कैशलेस ट्रांजेक्शन पर विश्वास रखते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें दो फीसदी अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं, जो गलत है।
बैंकिंग के जानकार बताते हैं कि स्वाइप मशीनें दुकानदार ग्राहकों की सुविधा के लिए लगाता है ताकि उसके पास ग्राहक ज्यादा आ सकें। जिस बैंक की मशीन दुकान में लगी होती है, उस बैंक और दुकानदार के बीच समझौता होता है। इसमें ग्राहक से कार्ड स्वैप करने की बदौलत कोई चार्ज वसूल न करने के बारे में लिखा होता है। लेकिन दुकानदार बैंक के नाम पर ग्राहकों से इसकी वसूली करते हैं। इससे लोग कैशलेस को छोड़ मजबूरी में नकद लेनदेन करते हैं।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक केके जसवाल का कहना है कि कार्ड स्वैप पर ग्राहक से दुकानदार कोई भी शुल्क नहीं ले सकता। अगर ऐसा कोई दुकानदार करता है तो इसकी शिकायत उपभोक्ता फोरम से की जा सकती है।