बिलासपुर के बरठीं के भल्लू पुल के पास हुए भीषण हादसा से पूरे क्षेत्र हिला गया है। घटनास्थल पर मौजूद सूबेदार मेजर कुलवंत सिंह पटियाल ने बताया कि यह जगह पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील थी। पहाड़ी से अकसर मिट्टी और पत्थर गिरते रहते थे, लेकिन विभाग ने इसे ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित करने या स्थायी सुरक्षा उपाय करने की कोई कोशिश नहीं की।
उनका कहना है कि भल्लू पुल का यह हिस्सा हमेशा से खतरे में बताया जा रहा था। बरसात के बाद पहाड़ी में दरारें पड़ गई थीं। ग्रामीणों ने कई बार विभाग को सूचित किया। आठ दिन पहले भी लोगों ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से इस हिस्से में को मजबूत और सुरक्षित करने की मांग की थी।
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मौके पर भीड़ और एंबुलेंस की गाड़ी
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इसके बावजूद इसको लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया। अब हुआ हादसा उस अनदेखी का परिणाम है। मरोतन से घुमारवीं रूट पर दिन में संतोषी बस दो बार चलती थी। भल्लू पुल के इस हिस्से पर एक ओर कच्ची पहाड़ी है तो दूसरी ओर गहरी खड्ड।
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जेसीबी से बचाव अभियान चलाते हुए टीम
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यात्रियों के पहाड़ी से नीचे खड्ड में गिरने की जताई थी आशंका
यही कारण है कि हादसे के बाद प्रशासन ने यह आशंका भी जताई कि कुछ यात्री पहाड़ी से नीचे खड्ड में गिर गए होंगे। खोज अभियान के दौरान जेसीबी मशीनों को नीचे तक उतारा गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई शव या व्यक्ति नीचे न दबा हो। यह बस रूट पर दिन में सुबह 7:30 बजे यह घुमारवीं बस अड्डे से चलकर सुन्हाणी, बरठीं, भड़ोली कलां, कलोल और जेजवीं होते हुए मरोतन पहुंचती थी।
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जेसीबी से बचाव अभियान चलाते हुए टीम
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15 परिवारों की खुशियां छीनी
दोपहर करीब 12:30 बजे वापस लौटती थी और फिर दोपहर एक बजे दूसरा फेरा लगाती थी। लगातार तीन दिनों से तेज बारिश ने पहाड़ी को कमजोर कर दिया था। इसके चलते मंगलवार को 15 परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों में सुबह लोग काम पर निकले थे, शाम तक वहां मातम छा गया था।
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हादसे के बाद बस का हुआ ऐसा हाल
- फोटो : पीटीआई
लोगों ने बचाव कार्य में की मदद
घटना के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और अपनी जान की परवाह किए बिना राहत कार्य शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में पुलिस, प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची। एनडीआरएफ की टीम ने रात करीब नौ बजे रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली।