हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में पिछले साल 12 जुलाई को आई भयंकर बाढ़ और बोह घाटी में हुए भूस्खलन के प्रभावितों के जख्मों पर एक साल बाद भी सरकार मरहम नहीं लगा सकी। वादे तो बहुत किए गए पर पूरे नहीं हुए। पुनर्वास के नाम पर घोषणाएं जमीन पर नहीं उतर सकीं। प्रभावित लोग आज भी वह खौफनाक मंजर याद कर सहम जाते हैं। 12 जुलाई, 2021 को जिला कांगड़ा में बारिश ने भारी तबाही मचाई थी। इस दौरान उपमंडल धर्मशाला में कई घर पानी में बह गए थे, वहीं कई पुल, सड़कें और पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई थीं।
कांगड़ा त्रासदी का एक साल: पुनर्वास की आस में बीत गया साल, भयानक मंजर याद कर दहल जाता है दिल, देखें तस्वीरें
चैतडू में बहे थे चार मकान और दो दुकान
विधानसभा क्षेत्र धर्मशाला के आखिरी कोने पर बसे चैतडू में प्रलयकारी बाढ़ में चार मकान और दो दुकानें बह गई थीं। आज वहां एक शेड में दुकान चल रही है। एक क्षतिग्रस्त मकान को कंकरीट की दीवार लगाई गई है, जबकि मांझी खड्ड के किनारे कंकरीट की दीवार लगाकर सड़क मार्ग को सुरक्षित किया गया है। लेकिन प्रभावित आज भी बेघर हैं।
अधूरा पड़ा है मनेड़ पुल का निर्माण कार्य
पंचायत ढगवार के कार्यालय के साथ जाने वाले रास्ते पर मनेड़ का पुल आता है, जो बीते साल बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुआ था। इसका एक पिलर क्षतिग्रस्त हुआ है। यहां पर पुल के साथ लगता श्मशानघाट भी बाढ़ की भेंट चढ़ा था। मौके पर देखा तो पाया कि पुल का एक पिलर अभी भी उसी स्थिति में है, जबकि श्मशानघाट के रास्ते पर कंकरीट की दीवार का कार्य चल रहा है, लेकिन अब बरसात के कारण वह ठप पड़ा हुआ है।
शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया पासू का जीप योग्य पुल
पंचायत पासू पंतेहड़ के वार्ड नंबर पांच में जीप योग्य पुल शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया है। पुल के बाढ़ में बहे पिलर लोगों को मायूस कर रहे हैं, जबकि उन्हें एक साल बाद भी 10 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों की ओर से की गई वैकल्पिक व्यवस्था भी अब मांझी खड्ड में पानी बढ़ने के साथ बह गई है।
पिलर तो बनाया पर स्लैब नहीं डाली
इसी पंचायत के वार्ड नंबर चार के तहत मांझी खड्ड पर बने पैदल पुल का एक पिलर और साथ लगती बावड़ी पानी की भेंट चढ़ी थी। इस दौरान स्थानीय विधायक के प्रयासों के बाद पुल के पिलर का कार्य तो हुआ, लेकिन इस पर स्लैब नहीं डल सकी। बरसात आते देख ग्रामीणों ने अधूरी पड़े पिलरों पर बांस का पुल खड़ा कर दिया, ताकि वे उफनती खड्ड को पार कर सकें।