आजादी के 75 साल पूरे हो चुके हैं। देश आज 76वें स्वतंत्रता दिवस के उल्लास में डूबा है लेकिन ये आजादी दिलाने में न जाने कितने स्वंत्रता सेनानी ने अपनी जान की बाजी लगाई है। भारत माता के वीर सपूत गुलामी की बेड़ियां तोड़ चुके थे पर आजाद भारत को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। उस समय भारत 500 से ज्यादा छोटी बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। ऐसी ही एक जोधपुर रियासत थी, सरदार पटेल न होते तो जोधपुर के कारण राजस्थान आज पाकिस्तान में होता।
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जोधपुर को पाकिस्तान में शामिल करना चाहते थे जिन्ना
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रियासतों को भारत में विलय कराना रहा सबसे मुश्किल
देश आजाद हो चुका था लेकिन आजादी के बाद रियासतों को भारत में शामिल कराना सबसे मुश्किल काम था। महाराजा लंबी-चौड़ी शर्तें भी रख रहे थे। ऐसे में सरदार वल्लभ भाई पटेल और नेहरू ने रियासतों को भारत में शामिल कराने की जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले ली। जिसके बाद पटेल वी.पी मेनन के साथ मिलकर राजा, रजवाड़ों, निजाम और महाराजाओं से मुलाकात करने लगे।
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सरदार पटेल और नेहरू
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जोधपुर के महाराजा पाकिस्तान में जाना चाहते थे
ऐसे में सबसे चर्चित किस्सा जोधपुर रियासत का था। जो एक पुराना और काफी बड़ा रजवाड़ा था। जोधपुर का राजा और अधिकांश प्रजा हिंदू ही थी। महाराजा हनुवंत सिंह के मन में किसी ने डाल दिया कि उसके राज्य की सीमा पाकिस्तान से भी छूती है। इसलिए वह वहां से बेहतर शर्तें मनवा सकता है।
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महाराजा हनुवंत सिंह
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जिन्ना ने महाराजा को कई प्रलोभन दिए
महाराजा ने मोहम्मद अली जिन्ना के सामने कई शर्तें रखीं। जिन्ना ने भी महाराजा हनुवंत सिंह को कई प्रलोभन दिए। जिन्ना ने महाराजा के सामने कराची के बंदरगाह की सुविधा देने, हथियारों की निर्बाध आपूर्ति और अकाल-पीड़ित जिलों के लिए खाद्यान्न की आपूर्ति करने का भरोसा दिलाया। इतिहासकार यहां तक कहते हैं कि मोहम्मद अली जिन्ना ने महाराजा को एक खाली पन्ना दे दिया था कि वो इसपर सभी शर्तें लिख सकते हैं।
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सरदार पटेल ने महाराजा को मनाया
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महाराजा को सरदार पटेल ने ऐसे मनाया था
जिन्ना और हनुवंत सिंह की बातचीत की खबर सरदार पटेल तक पहुंची। भारत को ये आशंका थी कि अगर जोधपुर पाकिस्तान में शामिल हुआ तो जयपुर और उदयपुर भी हाथ से निकल जाएंगे। इस मामले में सरदार पटेल ने समझदारी दिखाई। उन्होंने बिना कोई देरी किए तुरंत जोधपुर के महाराजा से संपर्क साधा। उसे हथियार, अनाज की आपूर्ति का भरोसा दिलाया। सरदार पटेल ने हनुवंत सिंह को समझाया कि वे एक मुस्लिम देश के साथ तालमेल बिल्कुल नहीं बिठा सकते। ऐसे में महाराजा मान गए। आखिरकार सरदार पटेल की कोशिश सफल हुई और महाराजा जोधपुर को भारत में विलय करने के लिए तैयार हो गए।
