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Azadi Ka Amrit Mahotsav: सरदार पटेल न होते तो पाकिस्तान में होता राजस्थान, जोधपुर को छीनना चाहते थे जिन्ना

Mon, 15 Aug 2022 12:03 PM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Mon, 15 Aug 2022 12:03 PM IST
सार

मोहम्मद अली जिन्ना जोधपुर को पाकिस्तान में शामिल करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जोधपुर महाराज को कई प्रलोभन भी दिए। भारत को डर था कि जोधपुर के साथ जयपुर और उदयपुर रियासत भी पाकिस्तान में शामिल हो जाएगी। जिसके बाद पटेल ने जोधपुर महाराजा को समझाने की जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले ली।

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Sardar Patel got Jodhpur merged with India Jinnah Jodhpur Story
सरदार पटेल और जिन्ना - फोटो : Social Media

आजादी के 75 साल पूरे हो चुके हैं। देश आज 76वें स्वतंत्रता दिवस के उल्लास में डूबा है लेकिन ये आजादी दिलाने में न जाने कितने स्वंत्रता सेनानी ने अपनी जान की बाजी लगाई है। भारत माता के वीर सपूत गुलामी की बेड़ियां तोड़ चुके थे पर आजाद भारत को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। उस समय भारत 500 से ज्यादा छोटी बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। ऐसी ही एक जोधपुर रियासत थी, सरदार पटेल न होते तो जोधपुर के कारण राजस्थान आज पाकिस्तान में होता।

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जोधपुर को पाकिस्तान में शामिल करना चाहते थे जिन्ना - फोटो : Amar Ujala Digital

रियासतों को भारत में विलय कराना रहा सबसे मुश्किल
देश आजाद हो चुका था लेकिन आजादी के बाद रियासतों को भारत में शामिल कराना सबसे मुश्किल काम था। महाराजा लंबी-चौड़ी शर्तें भी रख रहे थे। ऐसे में सरदार वल्लभ भाई पटेल और नेहरू ने रियासतों को भारत में शामिल कराने की जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले ली। जिसके बाद पटेल वी.पी मेनन के साथ मिलकर राजा, रजवाड़ों, निजाम और महाराजाओं से मुलाकात करने लगे। 

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सरदार पटेल और नेहरू - फोटो : Social Media

जोधपुर के महाराजा पाकिस्तान में जाना चाहते थे
ऐसे में सबसे चर्चित किस्सा जोधपुर रियासत का था। जो एक पुराना और काफी बड़ा रजवाड़ा था। जोधपुर का राजा और अधिकांश प्रजा हिंदू ही थी। महाराजा हनुवंत सिंह के मन में किसी ने डाल दिया कि उसके राज्य की सीमा पाकिस्तान से भी छूती है। इसलिए वह वहां से बेहतर शर्तें मनवा सकता है।

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महाराजा हनुवंत सिंह - फोटो : Social Media

जिन्ना ने महाराजा को कई प्रलोभन दिए
महाराजा ने मोहम्मद अली जिन्ना के सामने कई शर्तें रखीं। जिन्ना ने भी महाराजा हनुवंत सिंह को कई प्रलोभन दिए। जिन्ना ने महाराजा के सामने कराची के बंदरगाह की सुविधा देने, हथियारों की निर्बाध आपूर्ति और अकाल-पीड़ित जिलों के लिए खाद्यान्न की आपूर्ति करने का भरोसा दिलाया। इतिहासकार यहां तक कहते हैं कि मोहम्मद अली जिन्ना ने महाराजा को एक खाली पन्ना दे दिया था कि वो इसपर सभी शर्तें लिख सकते हैं। 

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सरदार पटेल ने महाराजा को मनाया - फोटो : Social Media

 महाराजा को सरदार पटेल ने ऐसे मनाया था
जिन्ना और हनुवंत सिंह की बातचीत की खबर सरदार पटेल तक पहुंची। भारत को ये आशंका थी कि अगर जोधपुर पाकिस्तान में शामिल हुआ तो जयपुर और उदयपुर भी हाथ से निकल जाएंगे। इस मामले में सरदार पटेल ने समझदारी दिखाई। उन्होंने बिना कोई देरी किए तुरंत जोधपुर के महाराजा से संपर्क साधा। उसे हथियार, अनाज की आपूर्ति का भरोसा दिलाया। सरदार पटेल ने हनुवंत सिंह को समझाया कि वे एक मुस्लिम देश के साथ तालमेल बिल्कुल नहीं बिठा सकते। ऐसे में महाराजा मान गए। आखिरकार सरदार पटेल की कोशिश सफल हुई और महाराजा जोधपुर को भारत में विलय करने के लिए तैयार हो गए।

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