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Up News: सपा की इस रणनीति से खिसक रही सियासी जमीन, डिंपल को टिकट देकर की फिर बड़ी गलती!
Wed, 16 Nov 2022 05:29 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
दीपक जैन, आगरा
दीपक जैन, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 16 Nov 2022 05:29 PM IST
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अखिलेश यादव और डिंपल यादव
- फोटो : अमर उजाला
एक दशक से राजनीति का बदला हुआ मिजाज समाजवादी पार्टी भांप नहीं पा रही है और अभी भी परिवारवाद से घिरी है। जबकि परिवारवाद और जातिवाद की सियासत से लोग किनारा करते दिख रहे हैं। शायद यही वजह है कि आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल दो बार दिल्ली में सरकार बनाने के बाद अपने दम पर पंजाब में भी सरकार बना ले गए। अब गुजरात और हिमाचल में दावा ठोक रहे हैं। सियासत के बदले इस मिजाज को इस बात से भी समझ जा सकता है कि अरसे बाद कांग्रेस ने परिवारवाद के ठप्पे को मिटाने के लिए पार्टी की कमान खरगे को सौंप दी।
डिंपल यादव और अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
जानकारों का कहना है कि डिंपल यह चुनाव जीत भी जाएं लेकिन सपा को इससे लंबी सियासी मजबूती नहीं मिल सकती है। देश की राजनीति में स्वर्गीय मुलायम यादव का कुनबा सैफई परिवार के नाम से जाना जाता है। गांव के प्रधान से लेकर लोकसभा सदस्य तक इस परिवार से हैं। रामगोपाल यादव, डिंपल यादव, शिवपाल यादव, तेज प्रताप, अक्षय यादव, धर्मेंद्र यादव के इर्द गिर्द ही सपा की राजनीति घूमती रहती है।
डिंपल यादव
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे नुकसान उठा रही सपा
जानकारों का कहना है कि जब परिवार के लोग खुद चुनाव लड़ रहे होते हैं तब उनका फोकस अपनी सीट निकाले पर अधिक रहता है। नेता दूसरी जगह कम फोकस कर पाते हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि सपा में हमेशा नंबर 2 की हैसियत रखने वाले प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने फिरोजाबाद से 2 बार अपने बेटे अक्षय यादव को चुनाव लड़ाया। बेटे को जिताने के लिए अधिकांश वह फिरोजाबाद में ही कैंप किए रहे। दूसरी जगह उतना समय नहीं दे पाए जितना स्टार प्रचारक होने के नाते देना चाहिए। यही स्थिति सपा के अन्य नेताओं की है।
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अखिलेश यादव और डिंपल यादव
- फोटो : अमर उजाला
डिंपल की हार से भी नहीं लिया था सबक
2009 में लोकसभा का उप चुनाव डिंपल यादव फिरोजाबाद से हार गईं थीं। उस चुनाव में एक मुद्दा परिवारवाद बनाम विकास था। आगरा जिले के विकास का मॉडल लेकर फिल्म अभिनेता राज बब्बर कांग्रेस की टिकट पर यहां से चुनाव लड़े थे। तब पूरी यूपी में कांग्रेस हाशिए पर थी फिर भी राज बब्बर इस लिए चुनाव जीत गए क्योंकि लोगों ने परिवारवाद को नकार कर विकास की उम्मीद को वोट दिया। यह चुनाव परिवारवाद पर कड़ी चोट था पर सपा संकेत समझ नहीं पाई।
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अखिलेश यादव और डिंपल यादव
- फोटो : अमर उजाला