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गोरखपुर हादसे में बड़ा खुलासा, मेडिकल कॉलेज में था ‘मैडम’ राज
amarujala.com, Presented by: शाहरुख खान
Updated Fri, 18 Aug 2017 06:42 PM IST
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बीआरडी अस्पताल, गोरखपुर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ‘मैडम’ राज चल रहा था। ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत मामले की जांच करने के लिए पहुंची तीन सदस्यीय टीम की प्रारंभिक जांच में इसका खुलासा हुआ है।
बीआरडी अस्पताल, गोरखपुर
पता चला है कि पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र की कुर्सी पर पत्नी डॉ. पूर्णिमा मिश्र काबिज रहती थीं। हर फाइल पर कमीशन का खेल चलता था। इसकी सीधी डीलिंग ‘मैडम’ यानी पूर्व प्राचार्य की पत्नी डॉ. पूर्णिमा ही करती थीं। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के 10 कर्मचारी और डॉक्टरों ने शपथ पत्र देकर डॉ. पूर्णिमा की शिकायत की है। ऑक्सीजन सप्लाई की फाइल भी उन्होंने ही रोकी थी। इसके पीछे भी कमीशन का खेल था। जांच टीम को 20 अगस्त तक रिपोर्ट देनी है।
बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज
- फोटो : ANI
शासन के निर्देश पर विशेष सचिव आयुष यतींद्र मोहन, ऋषिकेश दूबे, होम्योपैथ निदेशक विनोद कुमार विमल बृहस्पतिवार को सर्किट हाउस पहुंचे। सर्किट हाउस में ही डॉ. पूर्णिमा की शिकायत करने वाले राजन यादव, सिंगेश देवी और राहुल श्रीवास्तव को बुलाकर पूछताछ की। इन सबने कमीशन के खेल का खुलासा किया। सूत्रों ने बताया कि शासन की टीम ने मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टर, कर्मचारियों से भी पूछताछ की है।
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गोरखपुर
- फोटो : SELF
ज्यादातर ने बताया है कि कमीशन से लेकर कर्मचारियों की नियुक्ति आदि मामलों का फैसला मैडम ही करती थीं। फिर पूर्व प्राचार्य के उसपर हस्ताक्षर होते थे। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स से मैडम की ट्यूनिंग ठीक नहीं थी। इसी का नतीजा रहा कि बजट होते हुए भी ऑक्सीजन आपूर्ति का बकाया पैसा नहीं दिया गया। स्टाफ की नियुक्ति, पदोन्नति में नियमों की अनदेखी की बात भी कही गई है।
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बाबुओं से सीधे करती थीं डीलिंग
gorakhpur
जांच टीम को शिकायत मिली कि मैडम विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति और तैनाती में रकम उगाही करती थीं। ट्रांसफर, पोस्टिंग में में भी दखल चलता था। ऑक्सीजन खरीदने के मामले में 10 से 12 फीसदी कमीशन लिया जाता था।