मध्य प्रदेश की बैगा और गोंड जनजातियां जंगलों में रहती हैं। धीरे-धीरे इन जनजातियों की नई पीढ़ियां अपने पुराने रीति रिवाज़ों को छोड़ रही हैं।
पधारियां गांव के मुखिया प्रेम कहते हैं कि उनके गांव के कुछ घरों में टीवी सेट पहुंच चुके हैं, जिससे गांव के लोग नए फैशन, गीत-संगीत और फिल्मों से जुड़ रहे हैं।
70 साल के बैसुखा (बीच में) अपने पोते-पोतियों के साथ घर पर हैं। वे कहते हैं कि गांव के बुजुर्ग धोती और बंडी पहनते हैं जबकि आज-कल के बच्चे पैंट शर्ट पहनने लगे हैं।
उजियारो बाई के पूरे शरीर पर टैटू बना है। वे कहती हैं कि टैटू बैगा जनजाति की पहचान है, लेकिन अब लड़कियां स्कूल जाने लगी हैं और टैटू गुदवाने से इंकार करती हैं। आज-कल की लड़कियों को इन पारंपरिक टैटू से शर्म महसूस होती है।
इतवारी सिंह जंगली जानवरों के शिकार के लिए तीर-कमान का इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब बैगा समुदाय में शिकार करना लगभग खत्म हो गया है, इतवारी के बेटे रामनाथ बताते हैं कि वे अब मांसाहार के लिए मुर्गों और बकरों को पालते हैं।