लखनऊ में बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन तलाक पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें तीन तालक से पीड़ित महिलाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी आप बीती सुनाई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषण की कि पति से पीड़ित हिंदू और मुस्लिम महिलाओं को 6000 रुपये सालाना सहायता दी जाएगी। इस कार्यक्रम में यूपी के कई शहरों से तलाकशुदा महिलाएं पहुंचीं और उन्होंने अपना दर्द बयां किया। महिलाओं ने बताया कि किन मुश्किलों का सामना करके वे अपना और बच्चों का पालन पोषण कर रहीं हैं।
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सादिया बानों
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कानपुर के किदवई नगर से आईं शादिया बानों ने बहराईच के मोहम्मद अनीस से 1999 में लव मैरिज की थी। उनका कहना है कि ससुराल में जेठ ने साजिश रच कर जमीन व मकान पर कब्जा कर लिया। जिसको लेकर पति पत्नी में विवाद शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि करीब 12 साल से मायके में रहकर दो बेटों व एक बेटी की परवरिश कर रही हैं। उनका कहना है कि सरकार तलाक पीड़ित बेसहारा महिलाओं के गुजारे का बंदोबस्त कर दे तो ज्यादा बेहतर है। पति को सजा होने से उनका कोई भला नही होने वाला।
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तंजीला रहमान
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कानपुर के शुजातगंज की तंजीला रहमान का विवाह 2008 में रेल बाजार के सईद अहमद से हुआ था। पति के दूसरी औरत से ताअल्लुकात थे तो घर में झगड़ा शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले पिता अब्दुल रहमान के पास मायके आ गई। साल 2015 में एक दिन पति घर आया और भाई के सामने एक साथ तीन तलाक देकर चला गया। उन्होंने बताया कि नौ साल की बेटी है जिसकी परवरिश किसी तरह से कर रही हूं। तीन तलाक कानून बनने के बाद इंसाफ की उम्मीद जगी है।
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तहसीन बानों
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उन्नाव से आईं तहसीन बानों की शादी कानपुर के छोटे मियां का हाता में दो साल पहले कारी जमील से हुई थी। उनका कहना है कि विवाह के 15 दिन के बाद से ही पति ने मारपीट शुरू कर दी। वो लगातार पैसों की मांग करते रहे और मार्च माह में दो लाख रूपये की डिमांड रख दी। उन्होंने बताया कि बीती स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त को पति ने तलाक दे देकर छुटकारा ले लिया। तब से इंसाफ के लिये भटक रही हूं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाला कानून तो बन गया लेकिन इंसाफ आज भी नही मिल रहा है।
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शबनम और रुबीना
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कानपुर से आईं दो बहनें शबनम और रुबीना की शादी बलिया में एक ही परिवार में तीन दिसंबर 2015 में हुई थी। दोनों बहनों का आरोप है कि विवाह के एक महीने बाद से ही ससुराल में दहेज की मांग को लेकर मारपीट शुरू हो गई। इसके बाद दोनों बहने कानपुर में अपने मायके अपने पिता मोहर्रम अली के पास आ गईं। शबनम ने बताया कि बीती 26 अगस्त को पति खैरुलबशर का करीब चार साल बाद फोन आया और फोन पर ही तलाक दे दिया। बहन रुबीना का कहना है कि जब मैने फोन लिया तो उधर से पति मोहम्मद अली ने मुझे भी तलाक दे दिया। उन्होंने एक साथ तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाले कानून का स्वागत करते हुए कहा कि इस कानून से महिलाओं का हौसला बढ़ा है, उनके अंदर इंसाफ की उम्मीद जगी है।