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दर्दनाक कहानी: मां और पिता के गले लग रातभर रोती रही बिटिया, मारकर तोड़ दिए दांत, पानी में काम करते-करते सड़ गए पैर
Sun, 06 Dec 2020 11:10 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 06 Dec 2020 11:10 AM IST
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फाइल फोटो
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लखनऊ के बंगला बाजार से दस साल पहले लापता हुई बच्ची माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन, दादा व अन्य नाते-रिश्तेदारों का हंसता-खेलता परिवार देख समझ ही नहीं पा रही थी कि वह खुश होए की रोए। दो दिन तक लगातार वह रोती रही, कभी पिता के गले लगकर तो कभी दादा के कंधे पर सिर रख कर। वन स्टॉप सेंटर में काउंसिलिंग के दौरान भी वह सिर्फ रोती रही, उसके दिल के गुबार शब्दों में ढलकर निकलते रहे और वह प्रताड़ना की कहानी बताती रही।
अर्चना सिंह
- फोटो : अमर उजाला
वन स्टॉप सेंटर मैनेजर अर्चना सिंह ने बताया कि रेस्क्यू के बाद लड़की का ट्रॉमा से निकलना बहुत जरूरी था। परिवार के साथ और सेंटर पर काउंसिलिंग के बाद उसमें काफी बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार का महत्व यही होता है, जिस तरह से बेटी को सबने हाथों हाथ संभाला, हौसला दिया, वो भी सराहनीय है।
रुचिता चौधरी
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युवती ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि उससे किराएदारों के बाथरूम तक साफ करवाए जाते थे। मना करने पर दुर्व्यवहार होता था। उसने बताया कि इतने लंबे वक्त में शायद ही उसने कभी भरपेट खाना खाया हो, मनपसंद का खाना तो दूर की बात है। कहती है कि मेरे सामने सब दूध-लईया खाते, लेकिन किसी ने कभी पूछा नहीं। सिर्फ बचा हुआ खाने को मिलता था।
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मारकर तोड़ दिए दांत, पानी में काम करते-करते सड़ गए पैर
अपने टूटे दांत दिखाते हुए बताया कि ये दांत मार कर तोड़े गए हैं। काम न करने या कुछ मना करने पर मार पड़ती थी। काम में देरी कोई बर्दाश्त नहीं करता था। पैरों की हालत दिखाते हुए कहा कि ये हालत पानी में काम करते-करते हो गई, पैर सड़ गए। दवा तो दूर कभी तेल तक नहीं दिया गया।
अपने टूटे दांत दिखाते हुए बताया कि ये दांत मार कर तोड़े गए हैं। काम न करने या कुछ मना करने पर मार पड़ती थी। काम में देरी कोई बर्दाश्त नहीं करता था। पैरों की हालत दिखाते हुए कहा कि ये हालत पानी में काम करते-करते हो गई, पैर सड़ गए। दवा तो दूर कभी तेल तक नहीं दिया गया।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : social media
बहन को देख कहा-ये तो इतनी बड़ी हो गई...
संयुक्त परिवार के बीच खुद को पाकर वह एक-एक कर सबको निहार रही, समझने की कोशिश कर रही है। जब छोटी बहन सामने आई तो वह आश्चर्यचकित होकर खुशी से बोली, अरे ये तो इतनी बड़ी हो गई है। खाना बनाना भी सीख गई।
संयुक्त परिवार के बीच खुद को पाकर वह एक-एक कर सबको निहार रही, समझने की कोशिश कर रही है। जब छोटी बहन सामने आई तो वह आश्चर्यचकित होकर खुशी से बोली, अरे ये तो इतनी बड़ी हो गई है। खाना बनाना भी सीख गई।