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Akhilesh Yadav: यूपी में ही रहेंगे अखिलेश, चुनाव लड़ने से किनारा, जानें क्या है सपा अध्यक्ष की पूरी प्लानिंग?
Tue, 23 Apr 2024 03:01 PM IST
शाहरुख खान
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 23 Apr 2024 03:01 PM IST
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Akhilesh Yadav
- फोटो : एएनआई
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके पीछे सियासी निहितार्थ हैं। वह उत्तर प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाना चाहते हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए यूपी में बने रहना चाहते हैं।
Akhilesh Yadav
- फोटो : एएनआई
लोकसभा चुनाव के दौरान उनके आजमगढ़ अथवा कन्नौज से मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन आजमगढ़ से धर्मेंद्र यादव और कन्नौज से तेज प्रताप यादव को उम्मीदवार घोषित कर उन्होंने इन संभावनाओं पर विराम लगा दिया। हालांकि इसके पीछे रणनीति बताई जा रही है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
वरिष्ठ पत्रकार नागेंद्र का कहना है कि लोकसभा चुनाव न लड़ कर अखिलेश यादव ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। वह एक लोकसभा सीट पर खुद को बांधने के बजाय पूरे प्रदेश में चुनावी दौरे कर सकेंगे। दूसरी तरफ जनता के बीच मौजूद रहने का संदेश देंगे।
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Akhilesh Yadav
- फोटो : एएनआई
नेता प्रतिपक्ष के पास कैबिनेट मंत्री की तरह कई अधिकार होते हैं। प्रदेश की सियासत के आधार पर भी नेता प्रतिपक्ष का पद अहम माना जाता है। जबकि सांसद के पास निधि और कुछ विशेषाधिकार ही होते हैं।
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Akhilesh Yadav
- फोटो : एएनआई
पारिवारिक एकजुटता की कोशिश
अखिलेश यादव ने कन्नौज से तेज प्रताप यादव को मैदान में उतारकर पार्टी के अंदर किसी तरह के विरोध को उभरने से रोका है। कन्नौज से पहले डिंपल यादव सांसद थीं, लेकिन मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद वह मैनपुरी से लोकसभा उपचुनाव लड़ीं, जबकि यहां से तेज प्रताप सांसद रह चुके हैं। ऐसे में मैनपुरी के बदले कन्नौज देकर उन्होंने पारिवारिक एकजुटता का संदेश दिया है।
अखिलेश यादव ने कन्नौज से तेज प्रताप यादव को मैदान में उतारकर पार्टी के अंदर किसी तरह के विरोध को उभरने से रोका है। कन्नौज से पहले डिंपल यादव सांसद थीं, लेकिन मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद वह मैनपुरी से लोकसभा उपचुनाव लड़ीं, जबकि यहां से तेज प्रताप सांसद रह चुके हैं। ऐसे में मैनपुरी के बदले कन्नौज देकर उन्होंने पारिवारिक एकजुटता का संदेश दिया है।