अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को ढहाए गए ढांचे के केस में भाजपा के 12 बड़े नेताओं पर केस चलेगा। जानें आखिर क्या हुआ था उस दिन...
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बाबरी मस्जिद
- फोटो : amar ujala
6 दिसंबर 1992 का काला इतिहास आज भी लोगों के जेहन में है। तब केंद्र में कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार थी। सुबह 11 बजे के करीब वीएचपी नेता अशोक सिंघल, बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी, लाल कृष्ण आडवाणी बाबरी की तरफ बढ़ रहे थे।
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बाबरी मस्जिद
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तभी पहली बार इसका बाहरी दरवाजा तोडऩे की कोशिश हुई लेकिन पुलिस ने उसे नाकाम कर दिया। सुबह साढ़े 11 बजे तक विवादित स्थल सुरक्षित था। तभी वहां पीली पट्टी बांधे कारसेवकों का आत्मघाती दस्ता आ पहुंचा। कुछ ही देर में सुरक्षा में लगी पुलिस की इकलौती टुकड़ी वहां से बाहर निकल गई।
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तुरंत बाद मेन गेट पर दूसरा और बड़ा धावा बोला गया। दोपहर के 12 बजे कारसेवकों के नारों की आवाज पूरे इलाके में गूंजती जा रही थी। कारसेवकों का एक बड़ा जत्था दीवार पर चढऩे लगा। बाड़े में लगे गेट का ताला भी तोड़ दिया गया। कारसेवकों ने वहां कब्जा जमा लिया।
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कुदाल लिए हुए कारसेवक विवादित स्थल गिराने का काम शुरू कर चुके थे। कुछ ही घंटों में विवादित स्थल पूरी तरह से गिरा दिया।