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Lucknow News: महोत्सव का समापन करीब, सस्ती हुई किताबों की दुनिया
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लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।
लखनऊ। गोमती पुस्तक महोत्सव के समापन की ओर बढ़ते ही किताबों के दाम भी पाठकों को लुभाने लगे हैं। प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं ने स्टॉल पर आकर्षक ऑफर शुरू कर दिए हैं। कहीं पुस्तकों पर 50 फीसदी तक की छूट मिल रही है तो कहीं फिक्शन, नॉन फिक्शन और इतिहास से जुड़ी किताबें महज 100 रुपये में उपलब्ध हैं। कुछ स्टॉल पर किताबों की कीमत 50 रुपये से शुरू हो रही है।
ई लोकल शॉप स्टॉल के मालिक शुभम ने बताया कि उनके यहां से कोई भी पुस्तक खरीदने पर 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पुस्तकें पहुंचाना है। वहीं लक्ष्मी बुक डिपो के मालिक मनोज कुमार ने बताया कि उनके स्टॉल पर फिक्शन, नॉन फिक्शन और इतिहास से संबंधित कोई भी किताब 100 रुपये में खरीदी जा सकती है। कुछ अन्य स्टॉल पर भी किताबें 50 रुपये में उपलब्ध हैं।
पुस्तकों पर मिल रही छूट विद्यार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी है। लविवि के परास्नातक छात्र आर्यन कुशवाहा ने कहा कि गोमती पुस्तक महोत्सव जैसे आयोजन विद्यार्थियों को पुस्तकों की ओर लौटने का अवसर देते हैं। किताबों पर विशेष छूट मिलने से विद्यार्थी उतने ही पैसों में ज्यादा पुस्तकें खरीद पाते हैं। मेले में आई छात्रा पल्लवी मौर्या ने कहा कि जो किताब सामान्य दिनों में 200-300 रुपये में मिलती है, वही यहां 100 रुपये में मिल रही है। उन्होंने इसे अच्छी पहल बताया।
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किताबें पाठकों तक पहुंचाने पर जोर
गोमती पुस्तक महोत्सव के आठवें दिन ‘प्रत्येक पुस्तक को पाठक मिले’ विषय पर परिचर्चा हुई। सीएसआईआर के वैज्ञानिक रमेश गुप्ता ने कहा कि पुस्तकों को पुस्तकालयों तक सीमित रखने के बजाय पुस्तक मेलों, स्टॉल और अन्य माध्यमों से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए। परिचर्चा की अध्यक्षता उप्र पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष एवं सचिव विनोद कुमार मिश्रा ने की। समन्वय डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष एवं पुस्तकालयाध्यक्ष मनीष कुमार बाजपेयी ने किया। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय विभागाध्यक्ष डॉ. शरद सोनकर ने विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप पुस्तकें और बेहतर अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
3500 से अधिक बच्चों ने की रचनात्मक गतिविधियां
बाल मंडप में शनिवार को दिन की शुरुआत कठपुतली प्रस्तुति से हुई। राहुल, रिद्धि और कुलदीप ने दोस्ती पर आधारित कहानी कठपुतलियों के माध्यम से प्रस्तुत की। वैदिक गणित फन क्विज के जरिए बच्चों को वित्तीय जागरूकता से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। दिनभर आयोजित कार्यक्रमों में 3500 से अधिक बच्चों ने रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया।
गोमती के उद्गम से संरक्षण तक हुई चर्चा ‘नदी ने क्या याद रखा’ संवाद में गोमती नदी के उद्गम क्षेत्र, जैव विविधता, संरक्षण और नदी से जुड़े स्थानीय जीवन पर चर्चा हुई। सत्र का समन्वय फिल्मकार दीपिका चतुर्वेदी ने किया। इसमें पीलीभीत के कलीनगर के उपजिलाधिकारी प्रमेश कुमार शामिल हुए।
मुशायरे और संगीत से सजी शाम
महोत्सव के आठवें दिन की साहित्यिक संध्या राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) के सहयोग से आयोजित मुशायरे के नाम रही। मुख्य अतिथि ऑल इंडिया माइनॉरिटीज फोर फॉर डेमोक्रेसी के अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिजवी रहे। अध्यक्षता हसन काजमी ने की और संचालन एनसीपीयूएल के शोध सहायक डॉ. फैजानुल हक ने किया। हसन काजमी, मलिकजादा जावेद, पपलू लखनवी, मनीष शुक्ला, तारा इकबाल और चिराग सिंह बशर ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। समापन रिदम एंड स्ट्रिंग्स बैंड की संगीत प्रस्तुति के साथ हुआ।
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ई लोकल शॉप स्टॉल के मालिक शुभम ने बताया कि उनके यहां से कोई भी पुस्तक खरीदने पर 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पुस्तकें पहुंचाना है। वहीं लक्ष्मी बुक डिपो के मालिक मनोज कुमार ने बताया कि उनके स्टॉल पर फिक्शन, नॉन फिक्शन और इतिहास से संबंधित कोई भी किताब 100 रुपये में खरीदी जा सकती है। कुछ अन्य स्टॉल पर भी किताबें 50 रुपये में उपलब्ध हैं।
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पुस्तकों पर मिल रही छूट विद्यार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी है। लविवि के परास्नातक छात्र आर्यन कुशवाहा ने कहा कि गोमती पुस्तक महोत्सव जैसे आयोजन विद्यार्थियों को पुस्तकों की ओर लौटने का अवसर देते हैं। किताबों पर विशेष छूट मिलने से विद्यार्थी उतने ही पैसों में ज्यादा पुस्तकें खरीद पाते हैं। मेले में आई छात्रा पल्लवी मौर्या ने कहा कि जो किताब सामान्य दिनों में 200-300 रुपये में मिलती है, वही यहां 100 रुपये में मिल रही है। उन्होंने इसे अच्छी पहल बताया।
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किताबें पाठकों तक पहुंचाने पर जोर
गोमती पुस्तक महोत्सव के आठवें दिन ‘प्रत्येक पुस्तक को पाठक मिले’ विषय पर परिचर्चा हुई। सीएसआईआर के वैज्ञानिक रमेश गुप्ता ने कहा कि पुस्तकों को पुस्तकालयों तक सीमित रखने के बजाय पुस्तक मेलों, स्टॉल और अन्य माध्यमों से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए। परिचर्चा की अध्यक्षता उप्र पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष एवं सचिव विनोद कुमार मिश्रा ने की। समन्वय डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष एवं पुस्तकालयाध्यक्ष मनीष कुमार बाजपेयी ने किया। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय विभागाध्यक्ष डॉ. शरद सोनकर ने विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप पुस्तकें और बेहतर अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
3500 से अधिक बच्चों ने की रचनात्मक गतिविधियां
बाल मंडप में शनिवार को दिन की शुरुआत कठपुतली प्रस्तुति से हुई। राहुल, रिद्धि और कुलदीप ने दोस्ती पर आधारित कहानी कठपुतलियों के माध्यम से प्रस्तुत की। वैदिक गणित फन क्विज के जरिए बच्चों को वित्तीय जागरूकता से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। दिनभर आयोजित कार्यक्रमों में 3500 से अधिक बच्चों ने रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया।
गोमती के उद्गम से संरक्षण तक हुई चर्चा ‘नदी ने क्या याद रखा’ संवाद में गोमती नदी के उद्गम क्षेत्र, जैव विविधता, संरक्षण और नदी से जुड़े स्थानीय जीवन पर चर्चा हुई। सत्र का समन्वय फिल्मकार दीपिका चतुर्वेदी ने किया। इसमें पीलीभीत के कलीनगर के उपजिलाधिकारी प्रमेश कुमार शामिल हुए।
मुशायरे और संगीत से सजी शाम
महोत्सव के आठवें दिन की साहित्यिक संध्या राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) के सहयोग से आयोजित मुशायरे के नाम रही। मुख्य अतिथि ऑल इंडिया माइनॉरिटीज फोर फॉर डेमोक्रेसी के अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिजवी रहे। अध्यक्षता हसन काजमी ने की और संचालन एनसीपीयूएल के शोध सहायक डॉ. फैजानुल हक ने किया। हसन काजमी, मलिकजादा जावेद, पपलू लखनवी, मनीष शुक्ला, तारा इकबाल और चिराग सिंह बशर ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। समापन रिदम एंड स्ट्रिंग्स बैंड की संगीत प्रस्तुति के साथ हुआ।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।

लविवि में लगे गोमती पुस्तक मेले में पुस्तकें देखते हुए लोग।