लखनऊ। इंटैक के लखनऊ चैप्टर ने शनिवार को भागीदारी भवन में विरासत फैसिलिटेटर्स के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की। इसमें लखनऊ की धरोहरों की व्याख्या, संरक्षण और विरासत भ्रमण पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यशाला में 30 हेरिटेज फैसिलिटेटर्स ने भाग लिया। पर्यटन गाइड और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी में राज्य पुरातत्व विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने कहा कि धरोहर की व्याख्या प्रामाणिक और संवेदनशील हो। मूर्त और अमूर्त विरासत का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। तकनीकी सत्रों में वंदना सहगल ने हुसैनाबाद के स्मारकों की वास्तुकला बताई। रोशन तकी ने हुसैनाबाद के इतिहास पर जोर दिया। धर्मेंद्र मिश्रा ने पारंपरिक निर्माण सामग्री पर चर्चा की। एक पैनल चर्चा में अनुपमा श्रीवास्तव ने फैसिलिटेटर्स के नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई। दूसरी पैनल चर्चा में नूर खान ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही धरोहर के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। कार्यशाला का समापन एपी माहेश्वरी के संबोधन और प्रमाणपत्र वितरण के साथ हुआ।

इंटैक के लखनऊ चैप्टर ने शनिवार को भागीदारी भवन में विरासत फैसिलिटेटर्स के लिए क्षमता निर्माण का

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