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मस्जिद के लिए जमीन लेने पर सुन्नी वक्फ बोर्ड 24 को करेगा फैसला, धर्मगुरुओं ने कही ये बातें

Thu, 06 Feb 2020 01:53 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 06 Feb 2020 01:53 PM IST
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sunni waqf board will meet on 24 February on the land given by the government for the mosque.
जफरयाब जीलानी, डॉ कल्बे सादिक, मौलाना खालिद - फोटो : अमर उजाला

सरकार की ओर से मस्जिद के लिए मिली पांच एकड़ जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड सदस्यों से चर्चा के बाद निर्णय लेगा। इसके लिए बोर्ड ने 24 फरवरी को बैठक बुलाई है। बैठक में तय होगा कि सरकार की ओर से मिली जमीन को लेना है या नहीं। सरकार से मिली जमीन पर मस्जिद के साथ किन संस्थानों का निर्माण किया जाए इस पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत प्रदेश सरकार ने अयोध्या के रौनाही में सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन दी है। उप्र. सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैयद मो. शुऐब ने कि जमीन मिलने की जानकारी अभी तक समाचार के माध्यम से मिली है। सरकारी तौर पर बोर्ड को अभी इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। 24 फरवरी को बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। इसमें सभी सदस्यों से चर्चा कर आगे की कार्यवाही की जाएगी।


 


 
sunni waqf board will meet on 24 February on the land given by the government for the mosque.
जफरयाब जीलानी - फोटो : अमर उजाला
मस्जिद की जमीन के बदले में जमीन नहीं ली जा सकती है। यह शरीयत और कानून दोनों के खिलाफ  है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पहले से ही जमीन लेने के पक्ष में नहीं है। हालांकि जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ  बोर्ड को दी गई है, उसे तय करना है कि जमीन लेनी है या नहीं। सरकार ने जो जमीन दी है वो अयोध्या से 18 किमी दूर है। सरकार का फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ है, क्योंकि तब अयोध्या को जिला नहीं बनाया गया था। ऐसे में ये कोर्ट के फैसले की अवमानना भी है। - जफरयाब जीलानी, सचिव ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एवं संयोजक बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी
sunni waqf board will meet on 24 February on the land given by the government for the mosque.
मौलाना डॉ कल्बे सादिक - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुददे पर फैसला देकर पूरा मुद्दा खत्म कर दिया। मुस्लिम तो पहले से ही कह रहे थे कि जो भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा वो हमें मान्य होगा। इस समय देश को मंदिर-मस्जिद से ज्यादा स्कूल-कॉलेजों की जरूरत है। जो पांच एकड़ जमीन सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को दी है उस पर कोई शिक्षण संस्थान खुले और करीब ही कोई छोटी मस्जिद बन जाए। जितने भी धर्म हैं उनकी सबसे बड़ी तालीम ये है कि किसी भी इंसान के साथ ज़ुल्म और अन्याय नहीं होना चाहिए। - मौलाना डॉ. कल्बे सादिक, उपाध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
 
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sunni waqf board will meet on 24 February on the land given by the government for the mosque.
मौलाना सैफ अब्बास नकवी - फोटो : अमर उजाला

कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 3 महीने का समय मांगा था। सरकार ने तय समय के भीतर फैसला कर कैबिनेट की मंजूरी दे दी। राम मंदिर निर्माण के लिए हमारी शुभकामनाएं। मंदिर निर्माण ट्रस्ट में जिन हिंदू संगठनों ने शामिल होने की दावेदारी पेश की थी, उनको भी शामिल किया जाए, ताकि भविष्य में मंदिर निर्माण में कोई और विवाद न हो। सभी संगठनों को ट्रस्ट में शामिल करके मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। - मौलाना सैफ  अब्बास नकवी, अध्यक्ष शिया मरकजी चांद कमेटी


 
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वसीम रिजवी - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। सरकार ने हिंदुओं को मंदिर निर्माण का रास्ता साफ  करके उनका हक दिया। जो जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को मिली है, वो शिया वक्फ बोर्ड को मिलनी चाहिए थी। शिया समुदाय ने इसके लिए कभी आवाज नही उठाई, शिया वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में अपनी बात रखी, लेकिन 71 साल की देरी हो चुकी थी। जमीन अगर शिया वक्फ बोर्ड को मिलती तो बोर्ड उस जमीन पर दूसरा राम मंदिर का निर्माण करता। - वसीम रिजवी, अध्यक्ष शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड

 
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