मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले तीन साल में हिंदुत्व के ब्रांड, सख्त प्रशासक, विकासोन्मुख राजनेता और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की छवि को और निखारा है। फैसले लेने में दृढ़ता दिखाई है।
योगी सरकार के तीन साल का हिसाब: निखरा हिंदुत्व का ब्रांड पर हिंदुत्ववादी नेताओं की हत्या से उठे सवाल
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18 मार्च को अपनी सरकार के तीन साल पूरे कर रहे 48 वर्षीय योगी आदित्यनाथ भाजपा के पहले मुख्यमंत्री हैं, जो लगातार तीन साल तक इस पद पर रहे हैं। भाजपा के कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह प्रदेश की बागडोर संभाल चुके हैं, पर किसी के सिर लगातार तीन साल ताज नहीं रहा। सीएम बनने से पहले योगी यूपी विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं रहे। गोरखपुर लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद निर्वाचित हुए थे। विपक्ष में रहते हुए संघर्षों के अनुभव का उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में बखूबी इस्तेमाल किया।
सत्ता संभालते ही एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया। अपराधियों पर टूट पड़ने का निर्देश दिया। इसके बाद खूब एनकाउंटर हुए। संगठित अपराध पर काफी हद तक अंकुश लगा। हालांकि अपराध की कई बड़ी घटनाएं सरकार के लिए चुनौती बनी रहीं। इनमें फर्रुखाबाद में 20 बच्चों को बंधक बनाना, सोनभद्र में सामूहिक नरसंहार, नोएडा में मल्टीनेशनल कंपनी से जुड़े गौरव चंदेल और लखनऊ में टेलीकॉम कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या प्रमुख हैं। हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी, हिंदू महासभा के अध्यक्ष रणजीत बच्चन की हत्याएं भी चर्चा में रहीं।
सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलनों के प्रति कड़े रुख से योगी देश भर में चर्चा में आए। खासतौर से दंगाइयों से संपत्ति के नुकसान की वसूली करने का आदेश और उनकी फोटो सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित करने के फैसले सुर्खियों में रहे। इससे पहले अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने प्रदेश में जिस तरह की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की, उससे कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। देश भर में इसकी सराहना हुई है। कथित उपद्रवियों के फोटो चौराहों पर चस्पा करने के आदेश पर हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कानून नहीं होने का हवाला दिया तो योगी सरकार ने अध्यादेश लाकर इसे कानूनी जामा पहना दिया।
सांस्कृतिक सरोकारों के पैरोकार
योगी जिस गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर हैं, उसका धर्म-संस्कृति के संरक्षण में विशिष्ट योगदान व पहचान रही है। उनके गुरु और पूर्व सांसद महंत अवेद्यनाथ राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता रहे हैं। योगी उनकी परंपरा के वाहक के रूप में सांस्कृतिक सरोकारों के मुखर पैरोकार के रूप में उभरे हैं। मुख्यमंत्री बनने से पहले से उनकी छवि प्रदेश में हिंदुत्व के चेहरे की थी। उन्होंने इसे अपने फैसलों से देश भर में हिंदुत्व के ब्रांड के रूप में बदला है। भले ही इसके लिए उनके बयान चर्चा में क्यों न आए हों ?