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इन आईपीएस ने मंत्री के हत्यारे से बीच चौराहे पर मंगवाई थी माफी, फिर पैदल ही भिजवाया कोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 15 Nov 2018 03:45 PM IST
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आईपीएस सूर्य कुमार शुक्ला
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही अलग बात वाले वर्दीवालों से परिचित कराते हैं। इनमें सूर्य कुमार शुक्ला की अलग पहचान थी। उन्हें समाज में अपराधियों का मनोबल गिराने और जनता का मान बढ़ाने के लिए जाना जाता है।
- फोटो : डेमो
आईपीएस सूर्य कुमार शुक्ला को लखनऊ की कमान बड़े नाजुक मौके पर मिली थी। बसपा का शासन था और लामार्ट स्कूल के पास ही दिन-दहाड़े मंत्री लक्ष्मी नारायण की हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड का खुलासा और आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए सूर्य कुमार शुक्ला को लखनऊ के एसएसपी की कुर्सी सौंपी गई। छानबीन में आजमगढ़ के अंगद और कुख्यात बदमाश सूरजपाल का नाम आया था। सूरजपाल को गिरफ्तार करके आईपीएस सूर्य कुमार शुक्ला ने हजरतगंज चौराहे से पैदल ही कोर्ट तक भेजवाया था। इससे पहले उन्होंने बीच चौराहा पर सूरजपाल से माफी मंगवाई थी। सूरजपाल ने चिल्ला-चिल्लाकर कहा था कि अब वह अपराध नहीं करेगा।
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आईपीएस सूर्य कुमार शुक्ला 30 अक्तूबर 1995 से 15 अगस्त 1996 तक लखनऊ के एसएसपी के पद पर रहे। उन्होंने जनता का मान बढ़ाने और अपराधियों का मनोबल तोड़ने के लिए मनोवैज्ञानिक रणनीति बनाई थी। उन्होंने एसएसपी की कुर्सी संभालते ही खुद को जनता का भाई बताया। संकल्प लिया था कि भाई-बहन खुद को कमजोर न समझें। अपराधी जितना भी मजबूत क्यों न हो, उसे निष्पक्षता और दृढ़ता से दबाया जाएगा। अपराधियों को जिला छोड़कर चले जाने का भी ऐलान किया था।
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उन्होंने यह घोषणा की थी कि राजधानी के विभिन्न थाना क्षेत्र के अपराधी अगर शांति से जीवन बिताना चाहते हैं तो अपने मुहल्ले के 20 संभ्रांत लोगों से लिखवाकर दें। उन्हें जनता की गारंटी पर ही घर में रहने दिया जाएगा। वरना वह जिला छोड़कर चले जाएं। गांव-मुहल्लों में होने वाले छोटे-मोटे झगड़ों को वह थाना स्तर पर बने विशेष पुलिस अधिकारियों से पंचायत कराकर निपटवाते थे। थानेदारों को इस काम से दूर रखा जाता था। थानेदार की भूमिका सिर्फ विशेष पुलिस अधिकारियों के अंतिम निर्णय पर मुहर लगाने की होती थी।
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हॉर्स पावर पुलिसिंग बनी थी चर्चा का विषय
आईपीएस सूर्य कुमार शुक्ला अपने मातहत अफसरों के साथ हजरतगंज से चौक तक घोडे़ पर बैठकर और हाथों में एके-47 रायफल लेकर मार्च करते थे। उनका यह अंदाज ‘हॉर्स पावर पुलिसिंग’ के नाम से खूब चर्चित हुआ था। सूर्य कुमार कहते हैं कि वह और पुलिस के अधिकारी जब घोड़े पर बैठकर सड़क से गुजरते थे तो बदमाशों के मन में पुलिस और कानून के प्रति भय पैदा होता था।
आईपीएस सूर्य कुमार शुक्ला अपने मातहत अफसरों के साथ हजरतगंज से चौक तक घोडे़ पर बैठकर और हाथों में एके-47 रायफल लेकर मार्च करते थे। उनका यह अंदाज ‘हॉर्स पावर पुलिसिंग’ के नाम से खूब चर्चित हुआ था। सूर्य कुमार कहते हैं कि वह और पुलिस के अधिकारी जब घोड़े पर बैठकर सड़क से गुजरते थे तो बदमाशों के मन में पुलिस और कानून के प्रति भय पैदा होता था।