फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

नखलऊवा पंचः गद्दारी न होती तो 1857 में ही अंग्रेजों को सबक सिखा देतीं बेगम हजरत महल

Thu, 13 Dec 2018 04:23 PM IST
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 13 Dec 2018 04:23 PM IST
विज्ञापन
story of begum hazrat mahal
बेगम हजरत महल - फोटो : amar ujala
भले ही बेगम हजरत महल को राजकाज चलाने का कोई अनुभव नहीं था, पर नवाब वाजिद अली शाह के अंग्रेजों की कैद में होने के बाद भी उन्होंने खूबसूरती से अवध सल्तनत का राजकाज संभाला। वाजिद अली शाह की जगह गद्दी पर बैठे बिरजिस कदर की उम्र 14 वर्ष ही थी।
story of begum hazrat mahal
बेगम हजरत महल - फोटो : amar ujala
वह बेगम हजरत महल के सगे पुत्र भी नहीं थे, पर बेगम ने उन्हें पूरा संरक्षण दिया। नवाब वाजिद अली शाह की कैद से वह तिलमिला उठी थीं। तभी उन्हें पता चला कि वाजिद अली शाह के बड़े भाई मिर्जा मोहम्मद मुस्तफा अली खां को भी कई लोगों के साथ अंग्रेजों ने बेलीगारद (रेजीडेंसी) में बंद कर दिया है। बेगम हजरत महल पर किताब बताती है, ‘बेगम हजरत महल ने अवध में इधर-उधर छिपे फिरंगियों को पकड़कर इन्हें मुक्त कराने की योजना बनाई।
story of begum hazrat mahal
बेगम हजरत महल - फोटो : amar ujala
बेलीगारद की घेराबंदी कर दी। वह बेलीगारद के भीतर अंग्रेज अफसरों और भारतीय सिपाहियों के बीच मतभेद पैदा कर संघर्ष कराना चाहती थीं। उनका अनुमान था कि जब अंग्रेज अफसरों और उनके मातहत काम करने वाले भारतीयों में मतभेद हो जाएगा। तभी किसी अंग्रेज अफसर पर हमला कराकर भगदड़ करा देंगी। इससे अंग्रेज अफसर घबराकर वहां से निकल जाएंगे। इसके लिए बेगम ने दो ऐसे शख्स तलाश लिए जो बेलीगारद में रसद की आपूर्ति करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
story of begum hazrat mahal
बेगम हजरत महल - फोटो : डेमो
इनको जिम्मेदारी सौंपी कि वे वहां ऐसी अफवाहें फैलाएं, जिससे अंग्रेज अफसरों और उनके अधीन काम करने वाले भारतीयों में मतभेद हो जाए। निश्चित हुआ कि सिख रेजीमेंट के दो सिपाही 26 अगस्त 1857 को  बेलीगारद में कमान संभालने वाले अंग्रेज अफसर से वेतन मांगने जाएंगे। वेतन मांगने के दौरान बाहर से इशारा मिलते ही तमंचे से गोली चला देंगे।
विज्ञापन
story of begum hazrat mahal
बेगम हजरत महल - फोटो : डेमो
 तभी बाहर से दुर्ग जय सिंह और राणा बेनी माधव सिपाहियों के साथ हमला बोलकर फिरंगियों को हथियार डालने पर मजबूर कर देंगे, पर कुछ गद्दारों ने इसकी सूचना अंग्रेजों को दे दी। नतीजतन बेगम हजरत महल की रणनीति सफल नहीं हो पाई।’
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed