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Lucknow News: कथक और कजरी से सजी अवध की शाम

Wed, 07 Oct 2026 03:10 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 03:10 AM IST
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An Awadh evening adorned with Kathak and Kajri
कथक और कजरी से सजी अवध की शाम
लखनऊ। अवध की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत करते हुए मंगलवार को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगेजी सभागार में अवध संध्या का आयोजन हुआ। कोरोन काल में ब्रेक के बाद छह वर्ष बाद फिर शुरू हुई इस सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय गायन, कथक, कजरी और मलखंभ की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा। कार्यक्रम में पद्मश्री व वरिष्ठ लोकगायिका मालिनी अवस्थी मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने अवध संध्या को लखनऊ की सांस्कृतिक धरोहर बताया।
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कार्यक्रम की शुरुआत गाजियाबाद के शास्त्रीय व उपशास्त्रीय गायक डॉ. इंद्रेश कुमार मिश्रा की प्रस्तुति- धीरे-धीरे से झुलाओ मोरे प्यारे ललना से हुई। इसके बाद कथक केंद्र के कलाकारों ने कजरी के रंग में राग मेघ की बादल गरज नभ घोर शोर, बिंदादीन महाराज की झूलत राधे नवल किशोर और मिर्जापुरी कजरी घेरि घेरि आयी सावन की बदरिया प्रस्तुत की। नाथद्वारा परंपरा का हवेली संगीत रंग रंगीली छैल छबीलो भी आकर्षण रहा। प्रस्तुतियों का निर्देशन श्रुति शर्मा, नीता जोशी और रजनी वर्मा ने किया।
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मलखंभ और प्रदर्शनी ने बढ़ाई रंगत

झांसी के रवि प्रकाश परिहार व दल ने मलखंभ में शक्ति और संतुलन का प्रदर्शन किया। अकादमी परिसर में अवध थीम पर पुरातत्व निदेशालय, राज्य ललित कला अकादमी और राज्य संग्रहालय की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। संचालन डॉ. अलका निवेदन ने किया। इस मौके पर अतुल द्विवेदी और डॉ. राकेश सिंह समेत बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी मौजूद रहे।

कथक और कजरी से सजी अवध की शाम

कथक और कजरी से सजी अवध की शाम

कथक और कजरी से सजी अवध की शाम

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