मासूमों में बचपन से ही पुलिस का खौफ पैदा कर दिया जाता है। मां कहती है कि बेटा सो जाओ, वरना पुलिस पकड़ ले जाएगी, जबकि बच्चों को सिखाना चाहिए कि कोई खतरा नजर आए तो पुलिस को कॉल करना। पुलिस चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। ये बातें बृहस्पतिवार को लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने इरम पब्लिक कॉलेज में ‘अमर उजाला’ फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ में कही। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं को पुलिस के बारे में बताया और उनके सवालों के जवाब देकर भ्रांतियां दूर की। (आगे देखें- बच्चों के सवाल और उनके जवाब)
छात्रा ने एसएसपी लखनऊ से पूछा- पुलिस साथ न दे तो क्या करें... तो मिला ये जवाब, तस्वीरें
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- सृष्टि सिंह, कक्षा : नौ
जवाब : एसएसपी दीपक कुमार ने कहा कि उससे संबंधित सारे कागज मुझे दे दो, अगर संभव होगा तो एक दिन में समस्या का समाधान करवा दूंगा। कई बार कई वजहों से ऐसे मामलों में देरी होती है। इसमें केवल महकमे का ही दोष नहीं है।
- शशि कुमारी, कक्षा-10
जवाब : 1090 और डॉयल 100 नंबरों पर शिकायत करें। 1090 पर शिकायतकर्ता अपनी पहचान छुपा सकता है, जबकि डॉयल 100 पर कॉल करके अभद्रता करने वाले को जेल की हवा खिलवाई जा सकती है। उत्पीड़न का शिकार महिला की पहचान पुलिस उजागर नहीं करती।
सवाल : पुलिस साथ न दे तो क्या करें?
- प्रज्ञा दूबे, कक्षा दस
जवाब : मेरा नंबर नोट कर लो, मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा हूं।
सवाल : कैसे दर्ज होती है एफआईआर?
- इशिका कश्यप
जवाब : यह एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है। क्षेत्राधिकारी गाजीपुर की तरफ मुखातिब होकर बोले कि किसी दिन बच्चों को थाने बुलाकर पुलिस के कामकाज का तरीका समझाओ ताकि इनके मन से पुलिस के प्रति भय खत्म हो सके। उनके इस प्रस्ताव पर बच्चों ने भरपूर तालियां बजा कर समर्थन किया।