सीतापुर के खैराबाद इलाके में कुत्तों का आतंक इस कदर हावी है कि लोग अपना सारा काम छोड़कर कुत्तों को मार रहे हैं। बच्चे अपनी सुरक्षा के लिए लाठी और डंडा लेकर स्कूल जा रहे हैं। कुत्ते अब तक 9 बच्चों को निशाना बना चुके हैं। वहीं, प्रशासन ने कुत्तों को पकड़ने के लिए मथुरा से रक्षा कवच मंगाया है। यह रक्षा कवच कुत्तों को पकड़ने वाली टीम है। गुरुवार की सुबह से ही टीम ने अपना काम शुरू कर दिया। एक्सपर्टों ने शाम तक 24 खूंखार कुत्तों को पकड़ लिया। एक्सपर्टों की मानें तो पकड़े गए कुत्तों में कई वही आदमखोर हैं जिन्होंने हाल ही के दिनों में मासूम बच्चों को अपना निवाला बनाया था।
आदमखोर कुत्तों का आतंक: ग्रामीणों ने 12 को मारा, खौफ में जी रहे लोग, ऐसे स्कूल जा रहे बच्चे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक तरफ जहां प्रशासन द्वारा बुलाई गई टीम आदमखोर कुत्तों को तलाशकर उन्हें कैद कर रही, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र के बाशिंदों का आक्रोश कुत्तों पर कहर बनकर टूट रहा है। गुरुवार को भी आक्रोशित ग्रामीणों ने खुद भी पूरे क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया। इसमें बस कुत्तों को खोजो और मारों की आवाज गूंजती रही। शाम तक क्षेत्र के लोगों ने 12 कुत्तों को मौत के घाट उतार दिया। पालिका के सफाई निरीक्षक आशुतोष वर्मा ने बताया कि क्षेत्र में 12 कुत्तों के मारे जाने की सूचना है।
कुत्तों को पकड़ने के लिए मथुरा से आई टीम ट्रैंक्यूलाइजर गन का नहीं बल्कि पिंजरे का इस्तेमाल कर रही है। पिंजरे की बनावट ऐसी है कि उसका गेट टीम की मंशा के अनुसार खुलता और बंद होता है। पिंजरे में मांस का टुकड़ा रख दिया जाता है, जैसे ही कुत्ता पिंजरे के अंदर पहुंचता हैं, वैसे ही एक्सपर्ट गेट बंद कर देते हैं।
आदमखोर कुत्ते बड़े पिंजरे में कैद हो चुके थे, उन्हें दूसरे पिंजरे में डाला जाना था। इसके लिए जैसे ही टीम के एक सदस्य ने पिंजरे में लाठी डाली, पिंजरे में मौजूद आदमखोर ने लाठी को मुंह में दबा लिया। उसके बाद लाठी को ही बुरी तरह से चबा डाला। आदमखोर की यह हरकत देख हर किसी को विश्वास हो गया कि टीम ने सही कुत्ते को पकड़ा है। हालांकि पकड़े जाने के बाद कुत्ते गुर्राते और भौंकते नजर आए।
अभियान के बाद भी नहीं कम हो रहा खौफ
क्षेत्र में आदमखोर कुत्तों का आतंक इस कदर फैल चुका है कि हर तरफ लोग भयभीत नजर आ रहे हैं। प्रशासन का अभियान जरूर चल रहा है, लेकिन लोगों के दिलों से खौफ नहीं निकल रहा है। यही वजह है कि लोग अपने बच्चों को गोद में लेकर स्कूल छोड़ने जा रहे हैं। वहीं, जिन बच्चों के अभिभावक साथ नहीं होते, वे बच्चे झुंड में, डंडे हाथ में लेकर जा रहे हैं।