बायोप्सी या किसी तरह का चीरा लगने से कैंसर बढ़ता नहीं है। इससे कैंसर की स्थिति की जानकारी मिल जाती है। बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक इलाज शुरू करते हैं। इसलिए किसी भी भ्रांति में न पड़कर बेझिझक इसका इलाज कराने की जरूरत है। इलाज कराने के बाद तमाम लोग खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं।
100 से भी ज्यादा तरह का होता है कैंसर, डर छोड़ें और इलाज कराएं, पीड़िताओं ने साझा किए अपने अनुभव
इलाज के बाद लौटी आंखों की रोशनी
बस्ती की शीला पांडेय का कहना है कि मेरी आंखों की रोशनी कम हो रही थी। कई जगह इलाज कराने के बाद लोहिया संस्थान पहुंची। यहां न्यूरो सर्जन डॉ. कुलदीप यादव ने जांच की तो पता चला कि ब्रेन ट्यूमर है, जो आंख की विजन वाली नस पर दबाव बना रहा है। इसे डाक्टर ने मेनिंगोमा ट्यूमर बताया। कई लोगों ने सलाह दी कि ट्यूमर के कैंसरग्रस्त होने से जिंदगी नहीं बचेगी। इसलिए सर्जरी न कराएं, लेकिन डॉक्टर की सलाह मानी और अब पूरी तरह से ठीक हूं। मेरी आंखों से दिखाई भी देने लगा है।
मर्ज को छिपाएं नहीं, इलाज कराएं
लखनऊ की एक गृहिणी पुष्पा त्रिपाठी का कहना है कि मुझे 2017 में स्तन में गांठ जैसा महसूस हुआ। कुछ समय तक शर्म बस छिपाती रही, लेकिन बाद में दर्द होने लगा। 2018 में केजीएमयू पहुंची तो जांच में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई। सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी हुई। अब पूरी तरह से ठीक हूं। मैं राजधानी सहित देशभर की महिलाओं से कहना चाहती हूं कि बीमारी को छिपाएं नहीं। तत्काल बताएं और इलाज क राएं। सर्जरी से भी डरें नहीं।
हमने सिर्फ डॉक्टर की सुनी
लखनऊ की एक अन्य गृहिणी नीतू रस्तोगी का कहना है कि मुझे मार्च 2016 में स्तन कैंसर होने की पुष्टि हुई। पूरा परिवार सदमे की स्थिति में था। रिश्तेदारों में कुछ ने कहा कि सर्जरी कराओ और कुछ इस पक्ष में नहीं थे। मैं केजीएमयू में डा. आनंद मिश्रा से मिली। उन्होंने समझाया और बताया कि सर्जरी के बार भी सामान्य जिंदगी जीया जा सकता है। सर्जरी से कैंसर बढ़ना भ्रम है। इस भ्रम को तोड़ने की जरूरत है।
100 से अधिक किस्म के कैंसर
कैंसर के 100 से अधिक प्रकार माने जा रहे हैं। त्वचा से लेकर दिमाग, मुंह, गले, ग्रंथियों, अस्थियों, शिराओं, रक्त, स्तन, प्रजनन अंगों, फेफड़ा सहित हर अंग को यह प्रभावित कर सकता है। इनके नाम अक्सर उस सेल से जुड़े होते हैं जहां से ये शुरू होते हैं। इसमें कोशिकाओं से जुड़े कैंसर को कार्सिनोमा, टिश्यू व मांसपेशियों से संबंधित को सरकोमा, लिम्प नोड्स और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े टिश्यूज में होने वाला कैंसर लिम्पोमा श्रेणी में गिना जाता है। शिराओं में फैलने वाले और बच्चों में होने वाले को ल्यूकेमिया, ग्रंथियों की कोशिकाओं में होने वाले को एडेनोमास कहते हैं।