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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP Power Officers Association to send 20 cases of harassment of Dalit engineers to CM Yogi; launches a campai

यूपी: दलित अभियंताओं के उत्पीड़न के 20 मामले सीएम योगी को भेजेगा पावर आफिसर्स एसोसिएशन, खोला मोर्चा

Thu, 10 Sep 2026 08:01 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 10 Sep 2026 08:01 PM IST
सार

पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने दलित अभियंताओं के उत्पीड़न के आरोपों पर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। बैठक में दो वर्षों के 20 मामलों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजने का निर्णय लिया गया। अभियंताओं ने निलंबन, पदोन्नति रोकने, वेतन कटौती और पेंशन लाभ रोकने पर नाराजगी जताई। कार्रवाई जारी रहने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

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UP Power Officers Association to send 20 cases of harassment of Dalit engineers to CM Yogi; launches a campai
पावर आफिसर्स एसोसिएशन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पावर आफिसर्स एसोसिएशन की बृहस्पतिवार को फील्ड हॉस्टल में हुई बैठक में दलित अभियंताओं के उत्पीड़न के एक- एक मामले पर चर्चा की गई। अभियंताओं ने आक्रोश जताते हुए आरोप लगाया कि ऊर्जा प्रबंधन के अफसर जानबूझकर उत्पीड़न कर रहे हैं। इस दौरान दो साल में हुए दलित उत्पीड़न के 20 मामलों की तथ्यात्मक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजने का फैसला लिया गया।

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लखनऊ के फील्ड हॉस्टल में प्रदेशभर से जुड़े दलित एवं पिछड़े वर्ग के अभियंताओं ने विभिन्न जिलों में हुई कार्रवाई पर चर्चा की। अभियंताओँने कहा कि किसी भी अभियंता पर वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं है। कुछ को मात्र 21 दिन के कार्यकाल के आधार पर निलंबित किया गया। जिन लोगों को निलंबित किया गया है उनकी पत्रावलियां सालभर बाद भी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंची है। उसे जानबूझकर लंबित रखा गया है। इतना ही नहीं दलित वर्ग के मुख्य अभियंताओं की पदोन्नति रोकी गई। 
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हाईकोर्ट से बहाली के बाद भी निलंबन अवधि का आधा वेतन जब्त कर लिया गया और दो वेतन वृद्धियां रोकी दी गई। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक मामलों का समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए। छह माह से अधिक समय तक किसी मामले को लंबित रखना उचित नहीं है। इसका बाद भी एक से डेढ़ वर्ष तक अभियंताओं को निलंबित रखा गया है। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा

इससे अभियंताओं को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई गंभीर मानसिक तनाव में हैं। इस दौरान सेवानिवृत्त दलित अभियंताओं को पेंशन लाभ से वंचित रखने के मामले पर भी चर्चा की गई। पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य लाभ रोकने के मामले में प्रबंधन की निंदा की गई। तय किया गया कि पूरे प्रकरण की सिलसिलेवार रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा। 

अभियंताओं ने मांग की कि उत्पीड़न बंद करके सेवानिवृत्त अभियंताओं का तत्काल सभी तरह का भुगतान किया जाए। अभियंताओं ने कहा कि जब भी ऊर्जा निगमों पर संकट आया है दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं ने घंटों अतिरिक्त काम करके संकट से उबारने का काम किया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बंद नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश होंगे, जिसकी जिम्मेदारी ऊर्जा प्रबंधन की होगी। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, पीएम प्रभाकर, राम शब्द, हरिश्चंद्र वर्मा, मुकेश बाबू, पूरन चंद, अनिल कुमार, वाईएल कनौजिया, अरिजीत आदि ने संबोधित किया।

 

हाईकोर्ट से बहाली के बाद भी निलंबन अवधि का आधा वेतन जब्त

बैठक में दलित अभियंता मुकेश बाबू के प्रकरण को गंभीर उदाहरण के रूप में उठाया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि अभियंता के विरुद्ध किसी वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं था। फिर भी उन्हें निलंबित किया गया। जिस काम के लिए उन्हें निलंबित किया गया। उस स्थान पर वह सिर्फ 21 दिन कार्य किए थे। 

इस निलंबन के जरिए उनकी मुख्य अभियंता पद की पदोन्नति रोकी गई। अभियंता ने उच्च न्यायालय की शरण ली। आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी निलंबन अवधि का आधा वेतन जब्त कर लिया गया तथा उनकी दो वेतन वृद्धियां भी रोक दी गईं। सवाल उठाया कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उनकी बहाली हुई तो निलंबन अवधि के आधे वेतन की जब्ती तथा दो वेतन वृद्धियां रोकने की कार्रवाई किस आधार पर की गई?

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