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बेटी दिवस विशेष : मां-पापा की जुबानी कोरोना योद्धा बेटियों की कहानी, मुश्किलों में ऐसे निभाई ड्यूटी, तस्वीरें

Sun, 27 Sep 2020 06:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 27 Sep 2020 06:19 PM IST
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Special story on daughter's day.
- फोटो : amar ujala

हाथों की लकीर बेटियां... उम्मीद की किरण बेटियां, मां-पापा की आन बेटियां। जी, हां बेटियों के लिए ऐसे अनगिनत शब्द, उपमाएं यूं ही नहीं रची जाती हैं। जब-जब मौका मिला, बेटियों ने खुद को साबित किया है। यह हौसला ही है बेटियां का कि आज पूरी दुनिया उन्हें राफेल उड़ाते देखने जा रही है।



27 सितंबर को भारत में बेटी दिवस मनाया जा रहा है। ये महामारी की चुनौतियों का काल है। इस दौर में भी हमारी बेटियों ने अपना फर्ज निभाया है। इस कड़ी में हम आज बात करेंगे कोविड मरीजों की किसी न किसी रूप में देखभाल करने वाली बेटियों की। रेड जोन में ड्यूटी करने वाली बेटियों और माता-पिता के मन की उथल-पुथल की कहानी उन्हीं की जुबानी...

Special story on daughter's day.
- फोटो : amar ujala

मेरी हिम्मत और पूरी दुनिया हैं दोनों बेटियां
मेरी दो बेटियां ही हैं, और हमारी पूरी दुनिया इन्हीं की बदौलत है। ये हमारी आन और मान दोनों हैं। एक छोटे से शहर से जब से लखनऊ भेजा तो मैंने पूछा था कि क्या अकेले कर पाओगी। इसने पलट कर सवाल किया कि पापा क्या आपको भरोसा है। उस दिन उसका आत्मविश्वास देखकर मेरा हौसला बढ़ गया था। कोविड ड्यूटी की खबर मिली तो एक पिता का दिल डर गया था। इसने फोन कर कहा था कि पापा, आप मेरे पापा हैं, डरिएगा मत, बस सब डर खत्म। ये मेरी हिम्मत है।
- अनिल कुमार तिवारी, कार्डियोलॉजी टेक्नीशियन तृप्ति तिवारी के पापा

Special story on daughter's day.
- फोटो : amar ujala
मन में डर था, मगर उस पर भरोसा था
हमारी बेटी डॉ. नीतू सिंह केजीएमयू में प्रोस्थोडॉन्टिक्स डिपार्टमेंट में हैं। हालांकि वह खुद एक सात साल के बेटे की मां हैं, लेकिन हमारे लिए आज भी वही बिटिया नीतू है। उसने फोन कर बताया कि 19 अगस्त से एक सितंबर तक उसकी ड्यूटी कोविड सैंपलिंग एरिया में लगेगी। सैंपल लेना हमारी नजर में जोखिम भरा काम है। हम लोग उससे मिलकर कानपुर लौट आए। उसने रात को फोन कर सिर्फ इतना कहा कि पापा मुझ पर भरोसा रखिए, मैं मैनेज कर लूंगी। हमें गर्व है कि वह जोखिम लेने से नहीं डरती। - राम मोहन सिंह, बीनू सिंह, डॉ. नीतू सिंह के माता-पिता
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Special story on daughter's day.
- फोटो : amar ujala
जो डर गया वो जी कैसे पाएगा
मेरी बेटी साध्वी केजीएमयू में पैरामेडिकल स्टूडेंट है। रेड जोन में बनी कोविड हेल्प डेस्क में उसने ड्यूटी करना स्वीकार किया। फैसला लेने से पहले उसने मुझे फोन किया कि मम्मी मैं जहां ड्यूटी करने जा रही हूं, वहां कौन कोविड मरीज होगा, कौन नहीं ये तय करना मुश्किल है। हर वक्त मुझे इस संशय में जीना होगा, हो सकता है कि मैं किसी पॉजीटिव के संपर्क में आ जाऊं, आप डरेंगी तो नहीं। मैंने उससे कहा था कि जो डर गया वो जी कैसे पाएगा। मुझे गर्व है कि आज वह अपनी ड्यूटी पूरी शिद्दत के साथ निभा रही है।  - हेमलता, केजीएमयू में पैरामेडिकल स्टूडेंट साध्वी की मां
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Special story on daughter's day.
- फोटो : amar ujala

सिपाही जंग नहीं लड़ेगा तो करेगा क्या
मेरी बेटी जेआर स्वाति विश्वकर्मा मेडीकोज है और मुझे इस पर गर्व है कि मैं उसकी मां हूं। जब उसकी ड्यूटी लगाई गई तो उसने मुझे फोन कर यह नहीं बताया बल्कि उल्टे सवाल किया कि मम्मी अगर सिपाही जंग नहीं लड़ेगा तो क्या करेगा। उस दिन बात आई गई हो गई। जिस दिन उसकी ड्यूटी थी, उसने फोन कर कहा कि मां ड्यूटी पर जा रही हूं, मौका लगेगा तो बात होगी, मेसेज भेज दूंगी परेशान मत होना। तब मुझे अहसास हुआ कि उसने यह क्यों कहा था कि सिपाही जंग नहीं लड़ेगा तो क्या करेगा। मरीज के संपर्क में रहना, पीपीई किट पहनना कितना दिक्कत भरा है, यह हर वक्त सुनते रहते थे, डरी ही थी, पर उसने डर दूर किया।
-मंजु विश्वकर्मा, जेआर स्वाति विश्वकर्मा की मम्मी

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