‘तुम्हें ब्रेस्ट कैंसर है...।’ डॉक्टर से इतना सुनते ही जिंदगी की सांसें मानो उसी वक्त से थमने लगती हैं। सदमा सा लगता है, इंसान हर पल इस अहसास में जीने लगता है कि मौत मानो दरवाजे पर खड़ी हो। ज्यादातर मरीजों के साथ ऐसा होता है और हो भी रहा है। पर कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने एक पल के लिए भी मौत के डर को खुद के नजदीक नहीं आने दिया। कीमो की असहनीय पीड़ा भी उनके यकीन को तोड़ नहीं पाई। अक्तूबर को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है। हमने बात की ऐसी महिलाओं से जो कैंसर की बीमारी को हरा चुकी हैं और मिसाल हैं उनके लिए जो कैंसर का नाम सुनते ही घबराकर हिम्मत खो देते हैं। आइए जानते हैं ऐसी जिंदादिल महिलाओं की जुबानी उनके हौसलों की कहानी...।
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इनकी जिंदादिली ने कैंसर को भी दी मात, बोलीं- हर हालात में मुस्कराते रहें, हर मुसीबत जाएगी हार
Mon, 14 Oct 2019 04:36 PM IST
ishwar ashish
रोली खन्ना/अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 14 Oct 2019 04:36 PM IST
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स्तन कैंसर जागरूकता माह
- फोटो : अमर उजाला
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नीलम वैश्य सिंह
- फोटो : अमर उजाला
बाल जाने के बाद मैंने खुद को ज्यादा सुंदर महसूस किया
नीलम वैश्य सिंह
दिसंबर 2016 की बात है, मेरा वजन एकदम से घटने लगा। मैं थकने लगी। न कोई दर्द न कोई और लक्षण। थकान से मेरा रूटीन गड़बड़ाने लगा तो मैं अपने फिजिशियन के पास गई। कुछ दिन सामान्य इलाज चला, कुछ फायदा नहीं हुआ तो मेमोग्राफी कराई गई, कुछ नहीं निकला। एक और बार मेमोग्राफी हुई, पर फिर कुछ नहीं निकला। हालांकि आशंका पैदा हो चुकी थी। अपने फिजिशियन की सलाह पर हम आंकोलाजी सर्जन के पास गए, एफएनसी कराई तो पुष्टि हो गई कि ब्रेस्ट कैंसर है। कुछ पलों के लिए पूरा परिवार सदमे में आ गया। इसके बाद डॉक्टर के साथ हमारी मीटिंग हुई। डॉक्टर ने कुछ जरूरी चीजें बताईं और हमारी शंका का समाधान किया तो सारा डर जाता रहा और मुंबई में मेरा इलाज शुरू हो गया। अब मैं बिल्कुल ठीक हूं। कीमो शुरू होते ही मेरी स्किन और बाल दोनों पर असर पड़ा। 70 फीसदी बाद झड़ गए। मैंने पति से कहा कि मैं पूरे बाल हटवा देती हूं। जिस दिन मैंने बाल हटवाए, उस दिन कई पार्टिंयां थीं। मेरी फ्रेंड्स ने चलने को कहा और साथ ही ये भी कि तुझे खराब न लगे इसलिए विग लगा लो। मैंने खुद को शीशे में देखा तो लगा कि मैं पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हूं। बस धीरे-धीरे इलाज का दौर पूरा हुआ।
मेरी बात : इस दौरान मुझे एक सच का अहसास हुआ कि सही इलाज के साथ जागरूकता बहुत जरूरी है।
नीलम वैश्य सिंह
दिसंबर 2016 की बात है, मेरा वजन एकदम से घटने लगा। मैं थकने लगी। न कोई दर्द न कोई और लक्षण। थकान से मेरा रूटीन गड़बड़ाने लगा तो मैं अपने फिजिशियन के पास गई। कुछ दिन सामान्य इलाज चला, कुछ फायदा नहीं हुआ तो मेमोग्राफी कराई गई, कुछ नहीं निकला। एक और बार मेमोग्राफी हुई, पर फिर कुछ नहीं निकला। हालांकि आशंका पैदा हो चुकी थी। अपने फिजिशियन की सलाह पर हम आंकोलाजी सर्जन के पास गए, एफएनसी कराई तो पुष्टि हो गई कि ब्रेस्ट कैंसर है। कुछ पलों के लिए पूरा परिवार सदमे में आ गया। इसके बाद डॉक्टर के साथ हमारी मीटिंग हुई। डॉक्टर ने कुछ जरूरी चीजें बताईं और हमारी शंका का समाधान किया तो सारा डर जाता रहा और मुंबई में मेरा इलाज शुरू हो गया। अब मैं बिल्कुल ठीक हूं। कीमो शुरू होते ही मेरी स्किन और बाल दोनों पर असर पड़ा। 70 फीसदी बाद झड़ गए। मैंने पति से कहा कि मैं पूरे बाल हटवा देती हूं। जिस दिन मैंने बाल हटवाए, उस दिन कई पार्टिंयां थीं। मेरी फ्रेंड्स ने चलने को कहा और साथ ही ये भी कि तुझे खराब न लगे इसलिए विग लगा लो। मैंने खुद को शीशे में देखा तो लगा कि मैं पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हूं। बस धीरे-धीरे इलाज का दौर पूरा हुआ।
मेरी बात : इस दौरान मुझे एक सच का अहसास हुआ कि सही इलाज के साथ जागरूकता बहुत जरूरी है।
प्रवीन शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
एक बुरा दौर था जो हंसते-हंसते बीत गया
प्रवीन शर्मा
काफी दिन तक तो पता ही नहीं चला। एक दिन मुझे नहाते समय मुझे कुछ खटका। मैंने पति को बताया, पति ने भांजे से बात की। हालांकि किन्हीं कारणों से दिखा नहीं सके। एक दिन मैं खुद ही चली आई केजीएमयू। मुझे पहले किसी ने बताया नहीं कि कैंसर है। पता तब चला कि जब मुझे ऑपरेशन के लिए ले जाया जाने लगा। मैं एक मिलेट्रीमैन की बेटी हूं, घबरा कैसे जाती। मेरा स्तन निकाला नहीं गया हैं, सिर्फ कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाया गया है। मेरा ऑपरेशन इसी वजह से लंबा चला था। कीमो का असर मुझ पर भी हुआ, बाल मेरे भी पूरे चले गए। घर के लोग घबराए, चूंकि मुझे मालूम नहीं था कि कैंसर का इलाज चल रहा है इसलिए मैंने डॉक्टर से पूछा। उन्होेंने कहा कि दवाओं का असर है। खैर, ऑपरेशन के अगले दिन मैंने बिस्तर पर लेटे रहने केबजाय अपना रूटीन का सारा काम खुद करने की डॉक्टर से इजाजत मांगी। डॉक्टर हिचकिचाए लेकिन उन्होंने अनुमति दे दी। दवा चल रही है, फॉलोअप के लिए आती हूं और बिल्कुल ठीक हूं।
मेरी बात : बुरे दौर को हंसते-हंसते बिता दीजिए, स्तन कैंसर से घबराने की जरूरत नहीं, ठीक हो जाएगी बीमारी।
प्रवीन शर्मा
काफी दिन तक तो पता ही नहीं चला। एक दिन मुझे नहाते समय मुझे कुछ खटका। मैंने पति को बताया, पति ने भांजे से बात की। हालांकि किन्हीं कारणों से दिखा नहीं सके। एक दिन मैं खुद ही चली आई केजीएमयू। मुझे पहले किसी ने बताया नहीं कि कैंसर है। पता तब चला कि जब मुझे ऑपरेशन के लिए ले जाया जाने लगा। मैं एक मिलेट्रीमैन की बेटी हूं, घबरा कैसे जाती। मेरा स्तन निकाला नहीं गया हैं, सिर्फ कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाया गया है। मेरा ऑपरेशन इसी वजह से लंबा चला था। कीमो का असर मुझ पर भी हुआ, बाल मेरे भी पूरे चले गए। घर के लोग घबराए, चूंकि मुझे मालूम नहीं था कि कैंसर का इलाज चल रहा है इसलिए मैंने डॉक्टर से पूछा। उन्होेंने कहा कि दवाओं का असर है। खैर, ऑपरेशन के अगले दिन मैंने बिस्तर पर लेटे रहने केबजाय अपना रूटीन का सारा काम खुद करने की डॉक्टर से इजाजत मांगी। डॉक्टर हिचकिचाए लेकिन उन्होंने अनुमति दे दी। दवा चल रही है, फॉलोअप के लिए आती हूं और बिल्कुल ठीक हूं।
मेरी बात : बुरे दौर को हंसते-हंसते बिता दीजिए, स्तन कैंसर से घबराने की जरूरत नहीं, ठीक हो जाएगी बीमारी।
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मंजू तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
मुझे अभी जीना था, वेंटिलेटर से लौटी
मंजू तिवारी
मैं फैजुल्लागंज में रहती हूं। मेरी पति बिजनेस करते हैं। एक बेटा और एक बेटी है। दो साल पहले मुझे पता चला कि मुझे कैंसर है। डॉक्टर के पास गई तो उन्होंने केजीएमयू रेफर कर दिया। यहां आने पर पुष्टि हो गई कि मुझे स्तन कैंसर है। मेरे पति डर गए थे, लेकिन मैंने सोच लिया था कि घबराऊंगी नहीं। दुनिया में आए हैं तो कुछ न कुछ तो जीवन में लगा रहेगा। एक दिन सबको जाना है, फिर डरना कैसा। डॉक्टर ने बता दिया था कि मेरा पूरा स्तन निकाला जाएगा। कीमो के दौरान क्या-क्या लक्षण सामने आएंगे। बालों पर सबसे पहले असर होगा। जब मेरे बाल गए तो बच्चे हंसते थे और मोबाइल से फोटो खींच-खींच कर मुझे हंसाते रहते थे। हां, इस बीच तबीयत बिगड़ी। यहां तक कि मैं वेंटिलेटर पर चली गई। पर मुझे अपने बच्चों के लिए जीना था, तो मेरी सांसें कैसे थम जातीं और आज मैं ठीक हूं आपके सामने हूं।
मेरी बात : जिंदगी में हर हालात में मुस्कुराते रहें, कैंसर क्या हर मुसीबत हार जाएगी।
मंजू तिवारी
मैं फैजुल्लागंज में रहती हूं। मेरी पति बिजनेस करते हैं। एक बेटा और एक बेटी है। दो साल पहले मुझे पता चला कि मुझे कैंसर है। डॉक्टर के पास गई तो उन्होंने केजीएमयू रेफर कर दिया। यहां आने पर पुष्टि हो गई कि मुझे स्तन कैंसर है। मेरे पति डर गए थे, लेकिन मैंने सोच लिया था कि घबराऊंगी नहीं। दुनिया में आए हैं तो कुछ न कुछ तो जीवन में लगा रहेगा। एक दिन सबको जाना है, फिर डरना कैसा। डॉक्टर ने बता दिया था कि मेरा पूरा स्तन निकाला जाएगा। कीमो के दौरान क्या-क्या लक्षण सामने आएंगे। बालों पर सबसे पहले असर होगा। जब मेरे बाल गए तो बच्चे हंसते थे और मोबाइल से फोटो खींच-खींच कर मुझे हंसाते रहते थे। हां, इस बीच तबीयत बिगड़ी। यहां तक कि मैं वेंटिलेटर पर चली गई। पर मुझे अपने बच्चों के लिए जीना था, तो मेरी सांसें कैसे थम जातीं और आज मैं ठीक हूं आपके सामने हूं।
मेरी बात : जिंदगी में हर हालात में मुस्कुराते रहें, कैंसर क्या हर मुसीबत हार जाएगी।
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डॉ गीतिका नंदा
- फोटो : अमर उजाला
इसकी-उसकी नहीं बल्कि डॉक्टर की सुनिए
केजीएमयू के सर्जरी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गीतिका नंदा कहती हैं कि भारत में हर दो में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर से मर जाती हैं। यूएस में आठ में से एक महिला इस बीमारी से मरती है। 2018 के आंकड़े बताते हैं कि विश्व में 24 फीसदी महिलाएं स्तन कैंसर की पीड़ा झेल रही हैं।
- 30 की उम्र पार करते ही हर महिला को सचेत हो जाना चाहिए और स्वत: परीक्षण करते रहना चाहिए। ध्यान रखें कि दर्द न होने वाली गांठ भी कैंसर हो सकती है।
- 40 की उम्र के बाद साल में एक बार चिकित्सकीय जांच जरूरी है। साल में एक मेमोग्राफी कराना चाहिए और डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए।
- कैंसर का इलाज संभव है, यदि मरीज समय से डॉक्टर के बाद पहुंच जाए। स्टेज 1 और स्टेज 2 में बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जाना संभव है। जबकि स्टेज 3 और 4 में भी इलाज हो सकता है और मरीज केजीने केदिनों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
- सिंकाई, रेडीएशन की तकनीक एडवांस हुई है। ऑपरेशन में भी पूरा ब्रेस्ट निकालने की जरूरत नहीं होती। खासकर स्टेज 1 और स्टेज 2 में।
- डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
केजीएमयू के सर्जरी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गीतिका नंदा कहती हैं कि भारत में हर दो में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर से मर जाती हैं। यूएस में आठ में से एक महिला इस बीमारी से मरती है। 2018 के आंकड़े बताते हैं कि विश्व में 24 फीसदी महिलाएं स्तन कैंसर की पीड़ा झेल रही हैं।
- 30 की उम्र पार करते ही हर महिला को सचेत हो जाना चाहिए और स्वत: परीक्षण करते रहना चाहिए। ध्यान रखें कि दर्द न होने वाली गांठ भी कैंसर हो सकती है।
- 40 की उम्र के बाद साल में एक बार चिकित्सकीय जांच जरूरी है। साल में एक मेमोग्राफी कराना चाहिए और डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए।
- कैंसर का इलाज संभव है, यदि मरीज समय से डॉक्टर के बाद पहुंच जाए। स्टेज 1 और स्टेज 2 में बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जाना संभव है। जबकि स्टेज 3 और 4 में भी इलाज हो सकता है और मरीज केजीने केदिनों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
- सिंकाई, रेडीएशन की तकनीक एडवांस हुई है। ऑपरेशन में भी पूरा ब्रेस्ट निकालने की जरूरत नहीं होती। खासकर स्टेज 1 और स्टेज 2 में।
- डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।