लखनऊः धमाल मचाने को तैयार संस्कृत रॉक बैंड, वाद्य की धुनों संग अब श्लोकों पर झूमने की बारी
आने वाले दिनों में शहरी इसका आनंद उठा सकेंगे। शहर के संस्कृत व संगीत के युवाओं ने मिलकर संस्कृत शंखनाद रॉक बैंड काे तैयार किया है। नगर के एक नामी स्कूल के शिक्षक और बैंड के लीडर सिंगर आचार्य सोमेंद्र शुक्ल ने बताया कि संस्कृत रॉक बैंड बनाने का उद्देश्य प्राचीन संस्कृत भाषा को आधुनिक तरीकों से जोड़कर युवा पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि बैंड को तैयार करने में करीब एक साल का समय लगा।
संस्कृत में होंगे रफी के गीत
लीड सिंगर आचार्य सोमेंद्र ने बताया कि संस्कृत शंखवादन बैंड की शुरुआती प्रस्तुतियों का जो प्रारूप तय है उसमें शंकराचार्य रचित स्त्रोत, भज गोविंदम के अलावा कृष्णाष्टकम्, मधुराष्टकम्, अच्युताष्टकम्, शिव जी का लिंगाष्टकम्, शिवतांडव आदि शामिल हैं। आने वाले दिनों में इसमें देशभक्ति के चुनिंदा तरानों के अलावा मो. रफी के गाये या सहज बोलों वाले फिल्मों वाले गीतों को भी शामिल किया जाएगा।
सप्ताह में 8-10 घंटे तक करते हैं अभ्यास
आचार्य सोमेन्द्र ने बताया कि चूंकि सभी लोग नौकरीपेशा है। कोई संगीत की दुनिया से जुड़ा है तो कोई शिक्षा के पेशे से। ऐसे में रोजाना अभ्यास तो संभव नहीं, लेकिन सामंजस्य से बैंड के सारे सदस्य सप्ताह में दो-चार दिन एक स्थान पर एकत्र होकर नई-नई कंपोजीशन जरूर सीखते हैं। हर दिन मौका मिलने पर दो तीन घंटों का अभ्यास सत्र करते हैं। इस प्रकार सप्ताह में ठीकठाक अभ्यास एक प्रस्तुति का हो जाता है।
बैंड के अहम किरदारों में आचार्य सोमेंद्र शुक्ल संस्कृत में आचार्य हैं। वर्ष 2016 में भातखंडे संगीत विवि से संगीत गायन की शिक्षा ले चुके हैं। कभी कभार किसी प्रस्तुति में हारमोनियम के साथ उतरते हैं। म्यूजिक कंपोजर नितिन सक्सेना इलेक्ट्रिक गिटार बजाते हैं। इसके अलावा वे ड्रम, कीबोर्ड वादक भी हैं। मप्र के टीपू ठक्कर आक्टोपैड वादक हैं, श्याम साइड रिदम वादक हैं, जबकि तबले पर ऋषि साथ देते हैं। अभिसार जायसवाल ड्रम्स बजाते हैं, रिंकू राज कीबोर्ड और परिस्कृत पंत बेस गिटार वादक हैं। इसके अलावा कोरस में भी साथियों की मदद संगीत गायन के लिए ली जाती है। सोमेन्द्र संस्कृत भाषी होने के साथ गायन की अगुवाई करते हैं तो बाकी के अन्य किरदार भी संस्कृत के जानकार हैं।