मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'लोकतंत्र के एक सशक्त स्तंभ के रूप में शानदार 77 वर्षों की इस यात्रा के लिए अमर उजाला परिवार को मैं हृदय से बधाई देता हूं। लोकतंत्र की सशक्त आवाज है संवाद, लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है संवाद। कठिन से कठिन समस्या का समाधान का सशक्त माध्यम है संवाद। जहां संवाद बाधित होता है वहीं से संघर्ष के रास्ते प्रारंभ होते हैं। भारत का लोकतंत्र इतना सश्क्त है इसने अपने सभी स्तंभों के लिए लक्ष्मण रेखाएं भी तय की हैं, विधायकों को क्या करना है, कार्यपालिका की सीमाएं क्या हैं और न्याय पालिका की रचनात्मक भूमिका कैसे आगे बढ़ सकती है। वहीं, मीडिया भी किस रूप में अपनी जीवंत उपस्थिति के माध्यम से एक आम नागरिक को अपने साथ जोड़ सकती है। ये चारों स्तंभ अपनी लक्ष्मण रेखाओं का पालन करते हुए जब भी कार्य करेंगे तो ये मानकर चलिए वो लोकतंत्र को और भी पुष्ट करेगी। लोकतंत्र उतना ही आगे फलेगा-फूलेगा और अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज को उतना ही मजबूती के साथ हर स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।'
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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सीएम ने कहा, 'शासन की सभी प्रणालियों में लोकतंत्र को सबसे अच्छा इसलिए भी माना गया है। क्योंकि हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के एक समान अधिकार के साथ, समान मूल्यों के साथ जीने की पूरी स्वतंत्रता होती है। अगर हमें कही स्वतंत्रता मिली है अधिकार मिले हैं, तो उस अधिकार के संरक्षण के लिए अवश्यक है कि हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन उसी इमानदारी के साथ करें। सदैव से चला है कर्तव्य और अधिकारों के बीच में सदैव से एक द्वंद रहा है। कौन भारी है। कौन ज्यादा सश्क्त है। याद रखना कोई भी अधिकार तभी सुरक्षित है, जब तक वो अपने कर्तव्यों का इमानदारी से निर्वहन कर रहा है। अगर वो अपने कर्तव्यों से तनिक भी भटका तो उसके सामने स्वंय एक संकट उसके अस्तित्व का आ खड़ा होता है।'
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सीएम ने कहा, 'संवाद का ये कार्यमक्रम अमर उजाला परिवार ने आज यहां प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित किया है। लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी एक पौराणिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से ही है। अपने साथ एक विरासत लेकर चला है। एक लंबी परंपरा है। आज के लखनऊ को, जो उत्तर प्रदेश का केंद्र बिंदु है। पूरे उत्तर प्रदेश के लिए जो भी नीतियां बनती हैं, उसका केंद्रबिंदु है, स्वभाविक रूप से इस संवाद का यह कार्यक्रम लखनऊ के माध्यम से 25 करोड़ जनमानस तक न केवल पहुंचेगा, बल्कि उन 25 करोड़ लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व भी संवाद के माध्यम से इस मंच पर प्रभावी ढंग से इन दो दिनों के अंदर होता दिखाई देगा। मैं सबसे पहले इसकी हृदय से शुभकामान अमर उजाला परिवार को देता हूं।'
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सीएम योगी ने कहा, 'आज के इस संवाद कार्यक्रम पर मैं कहूंगा कि अमर उजाला एक शानदार यात्रा के साथ आगे बढ़ा हैं। 77 वर्षों की इस यात्रा को आगे कैसे लेकर चलना है, आजादी के एक वर्ष के बाद 1948 में अमर उजाला प्रकाशित होता है। 1948 से लेकर 2025 तक यह 77 वर्ष की यात्रा आज आपकी पूरी हो रही है। स्वभाविक रूप से आपने भी प्रधानमंत्री जी के संकल्प के साथ अपने आप को जोड़ा हुआ है। 2047 में यह देश अपना शताब्दी महोत्सव मना रहा होगा। 1947 का भारत कैसा होगा और 2048 में मीडिया की भूमिका क्या होगी। यह बात अमर उजाला के पाठकों को बतानी होगी कि कैसे 100 वर्षों के इस सफर में उन्होंने अपनी विकास यात्रा को कैसे अंजाम दिया। समग्र विकास में नौजवानों के लिए, अन्नदाता किसानों के लिए, श्रमिकों के लिए और समाज के अलग-अलग तबकों के लिए किस भूमिका के साथ हमने अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया। अनेक रचनात्मक कार्यक्रमों के साथ अमर उजाला परिवार कार्य करता है। यहां पर अतुल माहेश्वरी जी के नाम पर स्कॉलरशिप के कार्यक्रम चलते हैं। मेधावी छात्रों से संबधित कई कार्यक्रमों में मैंने भी हिस्सा लिया है। दिव्यांगों के लिए भी यह कई कार्यक्रम चलाते हैं। अन्य अनेक रचनात्मक कार्यक्रम होते हैं।'
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सीएम योगी ने कहा कि जैसे आज मुर्शिदाबाद जल रहा है, याद कीजिए 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में भी ऐसे ही होता था। मुजफ्फरनगर में छह महीने तक दंगा हुआ। बरेली के लिए तो जैसे साल में चार दंगे पेटेंट हो गए थे। अलीगढ़, लखनऊ , कानपुर जैसे जिलों में दंगे होते थे। लोग डर में रहते थे, व्यापारी व्यापार करने से घबराता था। आज तो दंगा नहीं होता। आज उत्तर प्रदेश दंगा मुक्त है।
सीएम योगी ने कहा, 'पूरा भारत कुंभ में आया। 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज की धरती पर आया। कही भी लूट की घटना नहीं, चोरी की घटना नहीं, अपहरण की घटना देखने को नहीं मिली। इस दौरान कोई आपराधिक घटना नहीं हुई। आतिथ्य सत्कार का उदाहरण कैसे प्रस्तुत होना चाहिए। यह उत्तर प्रदेश वासियों ने और प्रयागराजवासियों ने उसका एक अद्भूत परिचय देकर देश के अंतःकरण में एक छाप छोड़ी है। आखिर यह उत्तर प्रदेश बदला कैसे। ये तो वही उत्तर प्रदेश था, जहां हर दूसरे-तीसरे दिन दंगे होते थे।