लखनऊ के काकोरी की हाजी कॉलोनी में एटीएस से मुठभेड़ में मारा गया सैफुल्ला राजधानी में किराये के मकानों में रहकर आतंकी बनाने का स्कूल चलाता था। तीन महीने पहले वह बादशाह खान के मकान में आया था लेकिन इससे पहले कहां-कहां रहा? उसने लखनऊ के कितने युवाओं का माइंडवॉश किया? कहीं किसी को आईएस में शामिल होने के लिए सीरिया तो नहीं भेजा? यह ऐसे सवाल हैं जो एटीएस और खुफिया एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। एटीएस अधिकारियों का कहना है कि जब तक सैफुल्ला के साथ रहने वाले तीन और साथी हाथ नहीं लग जाते, इन सवालों का जवाब मुश्किल है।
आतंकी बनाने का स्कूल चलाता था सैफुल्ला, जांच में हैरान करने वाले खुलासे
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एटीएस अधिकारियों ने बादशाह खान के मकान में रहने वाले किरायेदारों से पूछताछ की तो पता चला कि सैफुल्ला के साथ तीन और संदिग्ध रहते थे। ये तीनों सोमवार शाम ही कमरे से गए थे। तीनों कौन थे और कहां गए? कहीं सैफुल्ला ने आईएस के किसी मिशन पर तो नहीं भेज दिया? एटीएस इसकी पड़ताल कर रही है। छानबीन में पता चला है कि संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला को बादशाह के मकान में कमरा दिलाने वाला दुबग्गा का फजलू है। फजलू को हिरासत में ले लिया गया है। उसकी सैफुल्ला से कैसे मुलाकात हुई, दोनों के बीच क्या संबंध हैं? इस बारे में पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार,फजलू से सैफुल्ला के साथियों का सुराग मिल सकता है। उसके जरिए एटीएस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हाजी कॉलोनी से पहले सैफुल्ला कहां रहता था। इसके बाद एटीएस कड़ी से कड़ी जोड़कर राजधानी में उसके पहले के ठिकानों का पता लगाकर पड़ताल करेगी। इससे राजधानी में सैफुल्ला के नेटवर्क और आईएस से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
3000 रुपये किराये पर लिया था कमरा
छात्र बनकर बादशाह के मकान में रह रहे सैफुल्ला ने 3000 रुपये प्रतिमाह किराये पर कमरा लिया था। पुलिस ने बताया कि जिस मकान में संदिग्ध आतंकी रह रहा था, उसका केयरटेकर पड़ोस में रह रहा एक मदरसे का मौलवी अब्दुल कय्यूम है। बादशाह खान दुबई में नौकरी करता है। यहां मलिहाबाद में उसकी पत्नी आयशा व परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं। मकान आयशा के नाम पर है और किराये की रकम भी उसे ही सौंपी जाती है। कय्यूम ही बादशाह के मकान में किरायेदार रखता था। फजलू ने सैफुल्ला को कय्यूम से मिलाया था। इसके बाद उसने किराया तय कर कमरा दे दिया।
पढ़ाई के साथ कंप्यूटर ट्रेनिंग का कोर्स कराने की बात कही थी
सैफुल्ला ने कय्यूम से खुद को खुद्दार और कौम के प्रति वफादार बताया था। उसने कहा कि वह मेहनत करके पढ़ाई कर रहा है और कौम के लोगों को कंप्यूटर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है। उसने कहा था कि वह हाईस्कूल पास कर चुका है और इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने आया है। कय्यूम उसकी बातों से प्रभावित हो गया था। खर्च कैसे चलता है? इस बारे में पूछने पर सैफुल्ला ने कहा था कि वह अपने लैपटॉप के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काफी कम कीमत में ट्रेनिंग देता है।