संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला और उसके तीन साथी फेसबुक पर आर्थिक रूप से कमजोर किशोरों को चिह्नित कर उनके मन में देश के प्रति नफरत के बीज बोते थे। किशारों का माइंडवॉश कर उन्हें आतंकी संगठन आईएस का साथ देने के लिए तैयार करते थे। इसके लिए उन्हें आईएस से जुड़ने पर होने वाले लाभ, लग्जरी लाइफ स्टाइल और मोटी कमाई का सपना दिखाया जाता था।
फेसबुक पर दोस्ती कर माइंडवॉश करता था मारा गया आतंकी सैफुल्ला
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एटीएस सूत्रों का कहना है कि सैफुल्ला के लैपटॉप की शुरुआती पड़ताल में गूगल व यू-ट्यूब पर आईएस और उसके मॉड्यूल के सबसे ज्यादा सर्च किए जाने के की-वर्ड मिले हैं। बता दें, एटीएस ने मंगलवार देर रात सैफुल्ला को मार गिराया था। फिलहाल फेसबुक अकाउंट पता करने के लिए उसके लैपटॉप को खंगाला जा रहा है।
एटीएस सूत्रों के मुताबिक, सैफुल्ला के कमरे में उसके अलावा और तीन युवक रहते थे। सैफुल्ला ने यू-ट्यूब पर बम बनाने के तरीके, पिस्टल से फायरिंग, उसे खोलना और फिर से असेंबल करना सीखा। वह सोशल मीडिया के जरिये कम उम्र के ऐसे लड़कों से संपर्क करता था, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती थी। ऐसे लड़कों से सैफुल्ला व उसके साथी काकोरी के ही किसी स्थान पर मिलते और दोस्ती करते थे। उन्हें दावतों के बहाने घर बुलाया जाता। खाने-पीने से लेकर मौज-मस्ती का हर खर्च उठाया जाता। इस दौरान सैफुल्ला धीरे-धीरे इन लड़कों का माइंडवॉश करता और उनके दिलो-दिमाग में देश के प्रति नफरत के बीज बो देता। जब लड़के पूरी तरह से सैफुल्ला के जाल में फंस जाते, तब उन्हें आतंक की ट्रेनिंग दी जाती।
गरीब किशोरों को देता था मोटी कमाई का लालच
सूत्रों का कहना है कि सैफुल्ला गूगल से आईएस का साहित्य डाउनलोड करता था। गूगल ट्रांसलेटर से उसे हिंदी में ट्रांसलेट करके नए लड़कों को बताता था। साथ ही यू-ट्यूब पर आईएस से जुड़े लोगों के लग्जरी लाइफ स्टाइल के वीडियो दिखाता था। गरीब किशोरों को ऐश की जिंदगी और मोटी कमाई का लालच दिया जाता था।
नजदीकी लड़ाई में माहिर था सैफुल्ला
कानपुर निवासी सैफुल्ला शॉर्ट कॉम्बैट (नजदीकी लड़ाई) में माहिर था। यही कारण है कि उसने एटीएस के प्रशिक्षित कमांडो और अनुभवी अधिकारियों को घंटों उलझाए रखा। उसने यू-ट्यूब पर शॉर्ट कॉम्बैट के कई अमेरिकी फिल्मों के वीडियो देखे थे। सैफुल्ला यू-ट्यूब के जरिए पिस्टल खोलना और असेंबल करना सीखा था।