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140 करोड़ से लखनऊ-कानपुर रूट पर बढ़ेगी इन ट्रेनों की रफ्तार, यात्रियों को मिलेगी राहत

Fri, 30 Aug 2019 04:58 PM IST
Amulya Rastogi नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ
नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 30 Aug 2019 04:58 PM IST
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Rs 140 crore needed to increase the speed of trains on lucknow-kanpur route
प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ-कानपुर रेलखंड पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए 140 करोड़ रुपये की दरकार है। यह धनराशि पटरियों, स्लीपरों, ट्रैक, सिग्नल, लेवल क्रॉसिंग वगैरह पर खर्च होगी। इस रेलखंड पर तेजस, पुष्पक, शताब्दी की स्पीड को बढ़ाया जा सकेगा और कानपुर के रास्ते दिल्ली जाने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की ओर से इसका प्रस्ताव जल्द रेलवे बोर्ड को भेजा जाएगा। दरअसल, लखनऊ से दिल्ली वाया कानपुर जाने वाली ट्रेनों को रफ्तार के मामले में कम क्षमता वाले ट्रैक से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उन्हें फुल स्पीड में नहीं दौड़ाया जा पा रहा है।

Rs 140 crore needed to increase the speed of trains on lucknow-kanpur route
प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ से कानपुर रूट की गति सीमा जहां 100 किमी प्रति घंटा है। वहीं कानपुर से दिल्ली की स्पीड 130 किमी प्रति घंटा है। ऐसे में लखनऊ से दिल्ली जाने वाली ट्रेनें कानपुर के बाद ही रफ्तार पकड़ पाती हैं। जबकि कानपुर तक सुस्त रफ्तार में ट्रेन चलाने की मजबूरी होती है। तेजस एक्सप्रेस का संचालन सितम्बर से शुरू होना है। यह सेमी हाईस्पीड ट्रेन है। जिसे 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा सकता है। पर, कानपुर तक ट्रैक की क्षमता कम होने की वजह से इसकी रफ्तार कानपुर के बाद ही बढ़ सकने की उम्मीद है।

Rs 140 crore needed to increase the speed of trains on lucknow-kanpur route
प्रतीकात्मक तस्वीर
हालांकि, अपने स्तर पर उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल लखनऊ से कानपुर के बीच ट्रैक को सुधारने का काम टुकड़ों में हुआ है। पर, ट्रैक को हाईस्पीड बनाने के लिए एकमुश्त बजट मिलने से मेंटेनेंस वर्क वृहद स्तर पर हो सकेगा, जिससे यात्रियों को बहुत आराम हो जाएगा। ट्रैक की क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रैक पर स्लीपरों के बीच की डेंसिटी (घनत्व) बढ़ानी होगी। वर्तमान में लगे स्लीपरों की जगह भारी स्लीपर लगाने होंगे। सिग्नलिंग सिस्टम अपग्रेड करना पड़ेगा और बैलास्ट पैकिंग नियमित रूप से करानी पड़ेगी। पुल, पुलिया आदि को भी मजबूत करना होगा। हाईस्पीड ट्रेनों के लिए ट्रैक के दोनों ओर बैरिकेडिंग भी आवश्यक है। फिलहाल लखनऊ से कानपुर रूट पर मेमू, पैसेंजर, मेल-एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेनों को उनकी फुल स्पीड पर नहीं दौड़ाया जा पा रहा है।

 
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Rs 140 crore needed to increase the speed of trains on lucknow-kanpur route
प्रतीकात्मक तस्वीर

यह है देश का सबसे हाईस्पीड ट्रैक
देश में दिल्ली से आगरा के बीच का ट्रैक हाईस्पीड है। जहां साल 2016 में गतिमान एक्सप्रेस को दौड़ाया गया था। इस ट्रेन को 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया था। वहीं देश के दो प्रमुख रेलखण्ड दिल्ली-मुम्बई व दिल्ली-हावड़ा रेलखण्ड की गति सीमा 130 किमी प्रति घंटा है। हालांकि, इसे बढ़ाकर 160 करने के बाबत रेलवे बोर्ड ने तैयार की है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
...ताकि ब्रेक लगाने में न हो देरी
रेलवे अधिकारी बताते हैं कि अभी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने से पहले होम सिग्नल होता है, जिससे पहले डिस्टेंट सिग्नल पड़ता है, जबकि हाईस्पीड ट्रैक में होम सिग्नल से करीब दो किलोमीटर पहले डिस्टेंट सिग्नल होता है, जिसे आउटर कहा जाता है और उससे एक किलोमीटर पहले इनर डिस्टेंट सिग्नल लगाना पड़ेगा, ताकि लोको पायलट को तेज रफ्तार ट्रेन को रोकने के लिए समय मिल सके।
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