यूपी: रिफांइड और चीनी के बाद अब प्रदेश में बढ़े गेहूं के दाम, आटे के साथ मैदा और चोकर भी हुआ महंगा; जानिए वजह
Inflation in UP: यूपी में महंगाई का असर जारी है। रिफांइड और चीनी के बाद अब प्रदेश में आटा और मैदा भी महंगा होने जा रहा है।
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महीने भर में ही चीनी के दामों में अप्रत्याशित तेजी के बाद अब गेहूं के दामों में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आई है। खास बात यह कि यह बढ़ोत्तरी एक हफ्ते के अंदर ही हुई है। कारोबारी बताते हैं कि गेहूं के कम उत्पादन, निर्यात पर रोक और ओएमएसएस (ओपन मार्केट सेल स्कीम) को न खोलना महंगाई की बड़ी वजह हैं।
लखनऊ मंडी में एक हफ्ता पहले गेहूं का रेट 2700 रुपये प्रति क्विंटल था जो कि इस वक्त 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक जा पहुंचा है। वहीं, फुटकर में यह 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकता है। इसी वजह से थोक बाजार में आटा 3100-3200 रुपये क्विंटल तो मैदा 3200-3400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच में है। वहीं, फुटकर बाजार में आटे की कीमत 35 रुपये किलो तो मैदे की कीमत 40 रुपये किलो हो गई है।
कारोबारी बताते हैं कि आटे व मैदे की कीमत में 3-5 रुपये प्रति किलो तक का अंतर आया है। शहर के फ्लोर मिलर व कारोबारी विकास सिंघल बताते हैं कि अगली पैदावार तक बाजार में गेहूं की कमी न हो इसलिए सरकार ने निर्यात पर रोक लगा दी है। क्योंकि, घरों में आटे की तो होटल और रेस्टोरेंट में मैदे की खपत सबसे ज्यादा होती है। निर्यात पर रोक लगने के कारण जिनके पास गेहूं का स्टॉक है, उन्होंने दाम बढ़ा दिए। हालांकि, सोमवार को 10-20 रुपये प्रति क्विंटल का बाजार टूटा है, लेकिन त्योहारों का दौर शुरू होने के बाद फिर से महंगाई बढ़ सकती है। बताया कि हम लोग अभी खुले बाजार से ही गेहूं ले रहे हैं।
क्या है ओएमएसएस
ओएमएसएस (ओपन मार्केट सेल स्कीम) के तहत भारतीय खाद्य निगम अपने सुरक्षित भंडार से अतिरिक्त गेहूं को आटा मिलों, व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं को ई-नीलामी के जरिये बेचता है। मकसद कम आपूर्ति वाले महीनों में बाजार में गेहूं की स्थिति को नियंत्रित करना है। इसके लिए सरकार न्यूनतम मूल्य तय करती है। अभी ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री शुरू नहीं की गई है।
20-30 प्रतिशत कम हुआ उत्पादन
कृषि विशेषज्ञ डॉ सत्येंद्र सिंह बताते हैं कि इस बार गेहूं के उत्पादन में 20-30 प्रतिशत तक की कमी आई है। यूपी, बिहार, हरियाणा, पंजाब में उत्पादन 20-30 प्रतिशत तक घटा है। देश भर का औसत उत्पादन 20 प्रतिशत प्रभावित हुआ है। बताया कि बाजार में बुवाई के समय तक जब कीमतें ज्यादा रहती हैं, तो किसान गेहूं की बुवाई में अतिरिक्त रुचि दिखाता है।