सरकारी व्यवस्था पर तो खूब व्यंग्य होते हैं लेकिन व्यवस्था में बैठे लोग ही जब खुद पर और खुद से जुड़ी व्यवस्था पर तंज करते हैं तो उसका रंग कुछ और ही गहरा हो जाता है। सप्रू मार्ग स्थित पुलिस ऑफिसर्स मेस में शुक्रवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में एसएसपी अमित पाठक ने व्यंग्य नाटक ‘आगरा का डाबरा’ प्रस्तुत किया। इसमें एसएसपी की भूमिका भी उन्होंने खुद ही की। इसे खूब पसंद किया गया।
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आगरा का डाबरा
- फोटो : amar ujala
ताजमहल देखने के लिए आने वाले वीवीआईपी मेहमानों की सुरक्षा और नए अफसरों की ट्रेनिंग की थीम पर प्रस्तुत नाटक में केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं पर भी जमकर चुटकी ली गई। नाटक का सार ये है कि बेल्जियम के राजा आगरा का ताजमहल देखने आते हैं। इसी दौरान एक महिला बेल्जियम के राजा के खिलाफ प्रदर्शन करती हुई पहुंच जाती है जिसे SSP रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन वह नहीं मानती। महिला बेल्जियम के राजा से शिकायत करती है कि उसको पेंशन मिलना बंद हो गयी, राशन मिलना बंद हो गया और उसकी बेटी को बेल्जियम का एक लड़का भगा ले गया है। नाटक के दृश्यों व उनके डॉयलॉग्स से सभी लोटपोट हो गए।
एक अन्य सीन में बेल्जियम के राजा फरमाइश करते हैं कि उन्हें स्विमिंग पूल में नहाना है। स्टेनो एसएसपी को बताता है कि सर यह प्रोटोकॉल में नहीं है। एसएसपी कहते हैं, कोई बात नहीं ऐसा करो स्विमिंग पूल में चार गार्ड पीएसी लगवा दो।
नाटक के एक और सीन में एक एएसपी ट्रेनिंग के लिए एसएसपी आगरा के साथ लगाए जाते हैं जिनका नाम इतना टेढ़ा होता है कि एसएसपी साहब सही उच्चारण नहीं कर पाते। तभी मथुरा के पेड़े वाले पाठक जी का फोन एसएसपी के पास आ जाता है और वह अपनी लड़की का रिश्ता नए एएसपी से कराने की जिद करने लगते हैं। नाटक में स्वच्छता अभियान, आईजीआरएस स्कीम और डीजीपी मुख्यालय के निर्देश पर चलने वाले अभियानों को बखूबी खिंचाई की गई है।
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आगरा का डाबरा
- फोटो : amar ujala
एक सीन में स्टेनो एसएसपी को 50 हज़ार के इनामी राष्ट्रगान की वजह से भाग जाने की सूचना देता है। वह बताता है सर ..बदमाश को पकड़ने ही वाले थे तभी वह ... जन गण मन... गाने लगा, दबिश में गए पुलिस कर्मी सावधान की मुद्रा में खड़े हो गए और बदमाश भाग गया... एसएसपी राष्ट्रगान का सम्मान करने वाली टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा कर देते हैं।