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पितृपक्ष 25 सितंबर से, यहां पढ़ें पूजन विधि और श्राद्ध करने का उचित समय

Wed, 19 Sep 2018 12:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 19 Sep 2018 12:53 PM IST
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pitrapaksha will start from 25 september
- फोटो : डेमो
पितरों के प्रति श्रद्धा और नमन का पर्व पितृपक्ष भले ही 25 सितंबर से शुरू हो रहा है लेकिन 24 सितंबर सोमवार की दोपहर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा का मान मिलने से पूर्णिमा को मृत्यु पाए पितरों का तर्पण-श्राद्ध कर्म करना श्रेयस्कर रहेगा।
pitrapaksha will start from 25 september
- फोटो : डेमो
अगले दिन मंगलवार सुबह 25 सितंबर से अश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा लगने पितृपक्ष में पितरों का पूजन-तर्पण उसी दिन से शुरू हो जायेगा। पितृपक्ष की जिन तिथियों में पितरों-पूर्वजों की मृत्यु हुई हो,  जजमानों को उन्हीं तिथियों में अपने पितर का तर्पण करना चाहिये। इसके अलावा प्रतिदिन भी श्राद्ध करना चाहिए।
pitrapaksha will start from 25 september
डेमो - फोटो : डेमो
गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि पितरों का श्राद्ध तर्पण मध्यान्ह में किया जाना श्रेयस्कर रहता है। उन्होंने बताया कि 24 तारीख की सुबह 6:36 बजे के बाद से पूर्णिमा का मान शुरू हो जायेगा, जो कि 25 की सुबह 7:41 बजे तक रहेगा। इसलिए षोडशी श्राद्ध करने वालों को 24 सितंबर की दोपहर ही पूर्णिमा को मृत्यु पाए पितरों का श्राद्ध करना उत्तम रहेगा।
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डेमो - फोटो : डेमो
जबकि 25 सितंबर को प्रतिपदा से पितृपक्ष की तिथिवार तर्पण होगा। आचार्य ने बताया कि पितृपक्ष की जिन तिथियों में पितरों-पूर्वजों की मृत्यु होती है, जजमानों को उन्हीं तिथियों में अपने पितर का तर्पण करना चाहिए। 
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डेमो - फोटो : डेमो
अमावस्या का श्राद्ध 8 अक्तूबर को
आचार्य प्रदीप ने बताया कि अकाल मृत्यु पाये, शस्त्रों से मृत्यु पाये या जिनका मृत्यु काल स्पष्ट न हो उन्हें अमावस्या को तर्पण करना चाहिये। अमावस्या का श्राद्ध 8 अक्तूबर को होगा। इस दौरान मंगल कार्यो से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि 3 अक्तूबर को मातृनवमी का सुहागिन औरतों का तर्पण करना उत्तम रहेगा। सन्यासी, गृहस्थों का श्राद्ध द्वादशी केदिन 6 अक्तूबर को करना उत्तम रहेगा। पितृ विसर्जन 8 करना ठीक रहेगा, क्योंकि 9 को भौमवती अमावस्या के दिन स्नान दान की आमवस्या रहेगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हस्त नक्षत्र मिलने केसंयोग केचलते गया आदि तीर्थो में श्राद्ध तर्पण करने से दान का विशेष फल पितरों को मिलेगा।
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