दिल्ली से लखनऊ पहुंचने वाले हर यात्री के पास संघर्ष व पीड़ा से भरी एक कहानी थी। किसी के पास पैसे नहीं थे तो कोई पैदल चल चलकर बेहाल हुआ। बसों से यात्रियों को चारबाग, आलमबाग बस अड्डे से कोसों दूर उतार दिया गया। इससे पैदल ही बस अड्डे तक पहुंचे। यहां बस मिलने में देर होते देख ट्रक व डाले से ही घर को निकल पड़े। जिन्हें ये भी नसीब नहीं हुआ, वे पैदल ही चल दिए।
हर किसी के पास पीड़ा और संघर्ष की कहानी, दिल्ली से लखनऊ पहुंचे यात्रियों ने सुनाई आपबीती
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राशन खत्म होने पर निकले घर
गोरखपुर के मनीष मिश्र व अभिषेक त्रिपाठी नोएडा की एक निजी कंपनी में काम करते हैं। साथियों संग मिलकर एक छोटा सा कमरा किराए पर लिया हुआ है। कोरोना के चलते लॉकडाउन हुआ तो कुछ दिन उसी कमरे में काटे। लेकिन राशन खत्म होने को आया तो साथी से कुछ रुपये उधार लेकर चुपचाप रात में लखनऊ के लिए निकल लिए। आनंदविहार पहुंचने से पहले ही पुलिस ने वापस खदेड़ दिया। पुलिस को दिक्कत बताई तो कुछ राशन का इंतजाम कर कमरे पर ही रुकने को कहा। कमरे पर लौटे तो बेचैनी बढ़ गई थी।
इस बीच साथियों ने बताया कि सरकार फंसे लोगों को वापस भेज रही है। शनिवार को आनंद विहार टर्मिनल पहुंच गए। वहां बंपर भीड़ के चलते बस तक पहुंचना मुश्किल था। उस भीड़ में जगह बनाई। किसी तरह डॉक्टरों तक पहुंचे और थर्मल स्कैनर जांच के बाद एक एसी डीलक्स बस में चढ़े। भीड़ के चलते हैंडल पकड़ कर खड़े हो गए। बस शाम 5 बजे आनंद विहार से चली। 960 रुपये किराया लिया। भीड़ में बच्चे, बूढ़े, महिलाएं, सब थे। सब कोरोना संक्रमण की आशंका से डरे थे।
रास्ते में बस एक ढाबे पर रुकी तो कुछ समाजसेवियों ने खाने का पैकेट और पानी की बोतल दी। यहां नीचे उतरकर बस की छत पर चढ़ गए और कुछ देर सो लिए। सुबह 3 बजे ड्राइवर ने बस रोक दी। पता लगा, नहरिया है। गोरखपुर की बस पकड़ने के लिए चारबाग जाना था, लेकिन कोई साधन न होने से पैदल ही चल दिए। सवा 4 बजे चारबाग पहुंचे। कई सारी बसें खड़ी थीं। लेकिन पता नहीं चला कि कौन सी बस गोरखपुर जाएगी। इस पर चुपचाप बैठ गया। सुबह हुई तो पुलिस ने बैरीकेडिंग करा दी, लेकिन बस नहीं चली। सुबह 11 बजे बताया गया कि बसें नहरिया से मिलेंगी। ऐसे में सामान उठाकर फिर पैदल नहरिया के लिए चल पड़े। नहरिया पहुंचे तो वहां बंपर भीड़ थी।
पैदल चलकर छूटा पसीना
कानपुर के रहने वाले आकाश और आशुतोष दिल्ली से लखनऊ के लिए बस में सवार हुए थे। आकाश ने बताया सुबह 4 बजे के करीब बस ने पॉलीटेक्निक चौराहे के पास उतार दिया। वहां से कानपुर जाने के लिए पैदल ही चारबाग पहुंचे तो पुलिस के कहने पर आलमबाग पहुंचे। बसों में कदम रखने की जगह नहीं थी। आठ घंटे की मशक्कत के बाद एक ट्रक में चढ़ गए। उसमें भी काफी लोग थे।