यह राहत भरी तस्वीर है। जिंदगी कोरोना से जंग जीतने लगी है। इसका गवाह ये चिताएं हैं, जो कभी डराती रहती थीं।
चिताएं सुबह-सुबह ही सज जातीं।। इसके बाद तो रात-दिन दहकती ही रहतीं।
बुधवार दोपहर तक यहां चिताएं खाली पड़ी रहीं, जो राहत देती हैं। ये बदलाव लॉकडाउन और जागरुकता से आया है। (सभी फोटो- मोहम्मद इमरान)
जानकारी के मुताबिक, बुधवार को रात नौ बजे तक 130 चिताएं जलीं जबकि एक सप्ताह पहले तक ये आंकड़ा 250 के करीब था।
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बैकुंठधाम (पुरानी तस्वीर)
- फोटो : amar ujala
वहीं, करीब एक महीने बाद श्मशान पर शवों का आंकड़ा पचास प्रतिशत तक कम होने से गोमती तट स्थित बैकुंठधाम और गुलाला घाट का नजारा शांत रहा। अन्य दिनों की तरह वहां नदी किनारे शाम तक चिताएं नही जलीं। पिछले कई दिनों से लगातार कम हो रहा शवों का आंकड़ा बुधवार को 130 रहा। जिसमें आधे संक्रमित शव माने जा रहे हैं। जबकि एक सप्ताह पहले तक श्मशान पर शवों का आंकड़ा 250 के करीब जा रहा था। जिसमें संक्रमित शवों का आंकड़ा करीब आधा रहता था।
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बैकुंठधाम (पुरानी तस्वीर)
- फोटो : amar ujala
शवों में आई इस कमी को लेकर अधिकृत तौर पर तो कोई रिपोर्ट नही आई है मगर यह माना जा रहा है कि यह लॉकडाउन की वजह से हुआ है। गोमती तट स्थित बैकुंठधाम और गुलालाघाट पर पर बुधवार रात नौ बजे तक अंतिम संस्कार के लिए 130 शव पहुंचे। उनमें 74 शव संक्रमित माने जा रहे हैं। शेेष शव सामान्य माने जा रहे हैं।
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बैकुंठधाम (पुरानी तस्वीर)
- फोटो : amar ujala
इधर कई दिनों से शवों का आंकड़ा कम हो रहा था। जिसमें सामान्य के साथ संक्रमित शवों की संख्या भी कम हो रही थी। संख्या कम होने के बाद भी संक्रमित शवों का आंकड़ा 100 और 120 तक बना हुआ था मगर बुधवार को उसमें काफी कमी आई। बुधवार को संक्रमित शवों का आंकड़ा 100 से नीचे जाकर 74 पर पहुंच गया।