ये कोरोना फाइटर्स फील्ड टीम की मदद के लिए संभाल रहे मोर्चा, 10 किलोमीटर साइकिल चलाकर आते हैं काम पर
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मुख्य कर निर्धारण अधिकारी और नगर निगम के प्रवक्ता अशोक सिंह ऑफिस से लेकर बाहर तक का काम देख रहे हैं। वार्डाें में सफाई और सैनिटाइजेशन के अलावा इनके पास सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन कर्मचारियों व अधिकारियों की सेवा से जुड़े सरकारी काम और वेतन आदि की है जो कोरोना से जंग में लगे हैं। यही वजह है कि लॉकडाउन में एक भी दिन अवकाश पर नहीं रहे।
घर वाले तो चिंतित, मगर काम जरूरी
राजू वर्मा अपर नगर आयुक्त अमित कुमार के निजी सचिव हैं। ऐसे में उनकी ड्यूटी का कोई समय नहीं है। लॉकडाउन के बाद से तो अब रविवार को भी छुट्टी नहीं है। राजू कहते हैं कि कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर किए जा रहे कार्यों को लेकर तमाम रिपोर्ट दिनभर तैयार करनी होती हैं। कई बार तो दस-दस मिनट पर रिपोर्ट देनी होती है। कोरोना को लेकर घर वाले तो चिंतित रहते हैं, लेकिन डर को निकालकर काम पर आना होता है।
नगर आयुक्त के निजी सचिव पवन यादव सुबह ऑफिस आते हैं तो रात में कब घर पहुंच पाएंगे कुछ पता नहीं रहता है। आफिस आने-जाने के दौरान कई बार पुलिस की सख्ती का शिकार भी हुए। सभी यही कहते हैं कि जब पुलिस रोक रही है तो क्यों जाते हो। अब उन्हें कौन बताए कि कोरोना को भगाना है तो ऑफिस जाकर जिम्मेदारी तो निभानी ही पड़ेगी।
फार्म स्टोर इंचार्ज राहुल कनौजिया की जिम्मेदारी लॉकडाउन के बाद से बढ़ गई है। लॉकडाउन में काम पर आने वाले नगर निगम कर्मचारियों के पास बनवाना, उनके वेतन-भत्तों की प्रक्रिया पूरी कराना। समय से वेतन मिल जाए उसके लिए बिल तैयार कराना और उन्हें लेखा विभाग तक भेजना। जो कर्मचारी ड्यूटी पर हैं, उनको कोई समस्या आए तो नगर आयुक्त के आदेश पर उसे दूर कराना। ऐसे में हर दिन 10 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है।