{"_id":"6a77992cd308f33fa00c1714","slug":"even-at-the-age-of-80-the-hands-havent-stopped-the-household-is-being-sustained-by-this-skill-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1867253-2026-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: 80 की उम्र में भी हाथ नहीं रुके, हुनर से चल रहा घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: 80 की उम्र में भी हाथ नहीं रुके, हुनर से चल रहा घर
विज्ञापन
इश्तियाक अली
कुलदीप सिंह
लखनऊ। उम्र के इस पड़ाव पर जब ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी जीना चाहते हैं, अलीगंज के चौधरी टोला निवासी 80 वर्षीय इश्तियाक अली के हाथ आज भी हुनर को आकार दे रहे हैं। करीब 65 वर्षों से कारपेंटरी कर रहे इश्तियाक अली ने कुछ वर्ष पहले लकड़ी और पेड़ों पर देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरने का हुनर विकसित किया। अब यही कला उनकी और उनकी पत्नी की जरूरतों का सहारा बनी हुई है। इश्तियाक अली पेड़ों और लकड़ी पर भगवान की आकृतियां उकेरने के बाद उनमें रंग भरकर आकर्षक रूप देते हैं। उनकी बनाई कलाकृतियां राहगीरों और आसपास के लोगों को आकर्षित करती हैं। लोग उनकी कला की सराहना करने के साथ ही इन्हें खरीद भी लेते हैं। इससे होने वाली आमदनी से वह अपना और पत्नी का खर्च चलाते हैं।
अलीगंज स्थित एलडीए स्टेडियम के पास एक पेड़ पर बनाई भगवान गणेश की आकृति इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रंग-बिरंगे रंगों से सजी इस आकृति को देखने के लिए सड़क से गुजरने वाले लोग कुछ देर रुकते हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी यह कलाकृति चर्चा का विषय है।
इश्तियाक अली के चार बेटे हैं, लेकिन उनके अनुसार उनकी जिम्मेदारी कोई नहीं उठा रहा है। इसलिए इस उम्र में भी उन्हें खुद काम करना पड़ रहा है। वह इसे मजबूरी के साथ अपने हुनर को जीवित रखने का जरिया भी मानते हैं। उनका कहना है कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता। हाथ में हुनर हो तो किसी भी उम्र में सम्मान के साथ जिंदगी चलाई जा सकती है। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। उम्र के इस पड़ाव पर जब ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी जीना चाहते हैं, अलीगंज के चौधरी टोला निवासी 80 वर्षीय इश्तियाक अली के हाथ आज भी हुनर को आकार दे रहे हैं। करीब 65 वर्षों से कारपेंटरी कर रहे इश्तियाक अली ने कुछ वर्ष पहले लकड़ी और पेड़ों पर देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरने का हुनर विकसित किया। अब यही कला उनकी और उनकी पत्नी की जरूरतों का सहारा बनी हुई है। इश्तियाक अली पेड़ों और लकड़ी पर भगवान की आकृतियां उकेरने के बाद उनमें रंग भरकर आकर्षक रूप देते हैं। उनकी बनाई कलाकृतियां राहगीरों और आसपास के लोगों को आकर्षित करती हैं। लोग उनकी कला की सराहना करने के साथ ही इन्हें खरीद भी लेते हैं। इससे होने वाली आमदनी से वह अपना और पत्नी का खर्च चलाते हैं।
अलीगंज स्थित एलडीए स्टेडियम के पास एक पेड़ पर बनाई भगवान गणेश की आकृति इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रंग-बिरंगे रंगों से सजी इस आकृति को देखने के लिए सड़क से गुजरने वाले लोग कुछ देर रुकते हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी यह कलाकृति चर्चा का विषय है।
विज्ञापन
इश्तियाक अली के चार बेटे हैं, लेकिन उनके अनुसार उनकी जिम्मेदारी कोई नहीं उठा रहा है। इसलिए इस उम्र में भी उन्हें खुद काम करना पड़ रहा है। वह इसे मजबूरी के साथ अपने हुनर को जीवित रखने का जरिया भी मानते हैं। उनका कहना है कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता। हाथ में हुनर हो तो किसी भी उम्र में सम्मान के साथ जिंदगी चलाई जा सकती है। (संवाद)

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली

इश्तियाक अली
विज्ञापन