रामनगरी में आस्था की इंद्रधनुषी छटा बिखरी हुई है। राम सियाराम, सियाराम जय-जय राम...की धुन के बीच अयोध्या का कण-कण राममय हो चुका है। लंका विजय के बाद अयोध्या लौट रहे अपने राम के अभिनंदन में रामनगरी के 791 पौराणिक स्थल जब बुधवार शाम आस्था के दिव्य प्रकाश से आलोकित हुए तो विराट अयोध्या के वैभव की झलक भी दिखी। हर कोई इस दिव्य-अलौकिक पल का साक्षी बनने के लिए बेसब्र दिख रहा था। दीपोत्सव जन-जन के मन में बस गया। देश-दुनिया के करोड़ों लोग इस दीपोत्सव के साक्षी बने। इस बार के दीपोत्सव में 14 वर्ष बाद वन से लौटे राम, सिया और लखन को अपने बीच देखने-मिलने का उत्साह तो भक्तों में दिखा ही, बल्कि कलियुग में पांच सदी के दर्द भरे इंतजार के बाद कोशलचंद्र दशरथनंदन राम का भव्य राममंदिर निर्माण शुरू होने का आनंद जन-जन में छाया हुआ था। अभी तक जो अयोध्या की पहचान थी, वो सबसे बड़े विवाद के रूप में थी। अब दीपोत्सव जैसे आयोजन अयोध्या की गरिमा-महिमा को पुर्नस्थापित कर रहे हैं।
देश-दुनिया के करोड़ों लोग दीपोत्सव के बने साक्षी : 791 पौराणिक स्थलों पर जले लाखों दीप, दिखी विराट अयोध्या के वैभव की झलक
नितिन मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 03 Nov 2021 08:28 PM IST
सार
रामनगरी के 791 पौराणिक स्थल जब बुधवार शाम आस्था के दिव्य प्रकाश से आलोकित हुए तो विराट अयोध्या के वैभव की झलक भी दिखी। हर कोई इस दिव्य-अलौकिक पल का साक्षी बनने के लिए बेसब्र दिख रहा था। दीपोत्सव जन-जन के मन में बस गया।
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