राजधानी लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र में एक बेहद खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक 49 वर्षीय मानवेंद्र सिंह की हत्या उनके ही 21 वर्षीय बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने गोली मारकर कर दी।
इतना ही नहीं, दरिंदगी की हद पार करते हुए आरोपी बेटे ने शव के टुकड़े कर दोनों हाथ-पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ घर के भीतर एक ड्रम में छिपा दिया। पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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शराब कारोबारी हत्या के बाद पुलिस को मौके पर लेकर जाता आरोपी बेटा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पड़ोसियों को छानबीन करता देख घबरा गया था अक्षत
पिता की हत्या के बाद अक्षत बार-बार घर से बाहर जा रहा था। पड़ोसियों के पूछने पर उसने कहा कि पिता 19 फरवरी को काम से दिल्ली गए थे और फिर नहीं लौटे। अक्षत ने ही 20 फरवरी को इसकी शिकायत थाने में की थी, ताकि उस पर कोई शक न करे। पड़ोसियों के पूछने पर उसने कहा कि पुलिस से शिकायत की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस पर पड़ोसी उसे लेकर थाने पहुंचे। थाने से सुनवाई नहीं होने पर एडीसीपी से शिकायत की गई। लखनऊ में पड़ोसियों को छानबीन करता देख अक्षत घबरा गया। उसे आभास हुआ कि पड़ोसियों को उस पर शक हो गया है। इसके बाद सोमवार दोपहर दो बजे उसने पिता के करीबी दोस्त सोनू को फोन कर कहा कि अंकल, पापा ने आत्महत्या कर ली है। यह सुनकर सोनू भागकर मानवेंद्र के घर पहुंचे।
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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजनों के मुताबिक, सोनू ने अक्षत से पूछताछ शुरू की तो उसने बताया कि 20 फरवरी को पापा ने सुसाइड कर लिया था। सोनू ने देर से जानकारी देने पर उसे डांट लगाई। फटकार के बाद कड़ाई से पूछताछ की तो अक्षत टूट गया और पूरी कहानी बताई। इसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।
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शराब कारोबारी हत्या के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खास बात यह है कि मानवेंद्र के भाई अरविंद उसी मकान में दूसरे तल पर परिवार के साथ रहते हैं। वारदात के वक्त भी वह दूसरे तल पर थे। हालांकि, सुबह होते ही परिवार के साथ जालौन चले गए। डीसीपी का कहना है कि कई बिंदुओं पर छानबीन की जा रही है।
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शराब कारोबारी हत्या के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के अनुसार, 21 फरवरी को आशियाना थाने में मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सक्रियता से जांच शुरू की। मानवेंद्र सिंह, जो सचिवालय सुरक्षा में तैनात थे, के भाई अरविंद कुमार से पूछताछ की गई। जब पुलिस ने मानवेंद्र के बेटे अक्षत से पूछताछ की, तो वह पहले तो गोलमोल जवाब देता रहा, लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।