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नोटबंदी के एक साल पर बोले व्यापारी, कहा- ये आपातकाल की तरह, कभी भुलाया नहीं जा सकेगा

Wed, 08 Nov 2017 05:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 08 Nov 2017 05:06 PM IST
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lucknow businessmen speak about one year of Demonetisation
अरुण कुमार और शैलेंद्र श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala
आज 8 नवंबर को नोटबंदी को एक साल हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को 500-500 और 1000-1000 के नोट बंद करने का फैसला लिया था। व्यापारियों के लिए नोटबंदी का पहला साल अच्छे दिन के आस की दुख भरी याद है। व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह लोग कांग्रेस के आपातकाल को नहीं भूल पाए, उसी तह नोटबंदी को भी कोई नहीं भूल सकेगा। नोटबंदी से व्यापारी-किसानों के साथ वे परिवार प्रभावित हुए जिनके घर में शादी थी। नोटबंदी को याद करके व्यापारी सहम उठते हैं। इसके बाद आयकर विभाग ने व्यापारियों के घर एवं कारोबार स्थल पर छापामारी की थी। इसकी याद उनके जेहन से कभी मिट नहीं सकती। पेश है व्यापारियों की प्रतिक्रिया पर रिपोर्ट। 
lucknow businessmen speak about one year of Demonetisation
विजय कुमार - फोटो : amar ujala
दुस्साहसिक फैसला रहा
नोटबंदी करना दुस्साहसिक फै सला है, जिसके दूरगामी परिणाम भुगतने होंगे। इस निर्णय को लागू करने में केंद्र सरकार की मंशा तो साफ दिखी, लेकिन इसे अमल कराने का तौर तरीका सही नहीं था। इसका खामियाजा सबसे ज्यादा देश की गरीब जनता ने भुगता। 
विजय कुमार, इन्दिरानगर
lucknow businessmen speak about one year of Demonetisation
अतुल राजपाल - फोटो : amar ujala
स्थिति से निपटने के नहीं थे इंतजाम
नोटबंदी से मुझे व्यक्तिगत रूप से दिक्कत नहीं हुई। लेकिन इसे लागू करने के तरीके से आम व्यापारी को बहुत परेशानी हुई। दरअसल इससे निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। नोटबंदी ऐसी कार्रवाई थी जिसमें गोपनीयता सबसे जरूरी तथ्य था। ऐसे में ज्यादा विशेषज्ञ से चर्चा भी नहीं कर सकते थे। 
- अतुल राजपाल, आलमबाग 
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lucknow businessmen speak about one year of Demonetisation
अरुण कुमार अवस्थी - फोटो : amar ujala
जल्दबाजी में की गई नोटबंदी
केंद्र सरकार ने बिना कोई तैयारी किए ही नोटबंदी को लागू कर दिया था। जल्दबाजी के इस फैसले से देश के मध्यम एवं गरीब तबके के साथ व्यापारी वर्ग परेशान हुआ था। व्यापारी नोटबंदी से उबर भी नहीं पाए कि उन्हें जीएसटी में उलझा दिया। इससे कारोबार पटरी से उतर चुका है। नोटबंदी एवं जीएसटी से व्यापारी सड़क पर आ चुका है। 
- अरुण कुमार अवस्थी, सीतापुर रोड
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lucknow businessmen speak about one year of Demonetisation
शैलेंद्र श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala
तीन साल पीछे हो गया देश
भारत की तरक्की नोटबंदी से रुक गई और वह अन्य देशों के मुकाबले तीन साल पीछे चला गया। देश की समानान्तर अर्थव्यवस्था खत्म होने से हमारी इकोनॉमी वैश्विक आर्थिक दुष्चक्र में फंस चुकी है। आम व्यापारी एवं उद्यमी को अब तक समझ में नहीं आया कि प्रधानमंत्री का नोटबंदी करने का औचित्य क्या था।  
शैलेंद्र श्रीवास्तव, अमौसी
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