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योग से सबको मिला फायदा, बीमारियों से मिली निजाद तो किसी को आध्यात्मिक ऊर्जा
Thu, 20 Jun 2019 07:35 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Thu, 20 Jun 2019 07:35 PM IST
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योग दिवस
- फोटो : amar ujala
योग किसी केलिए वजन कम करने का जरिया है, तो किसी के लिए साधना है। किसी के लिए जुनून है तो किसी के लिए समाज को स्वस्थ रखने की तकनीक। पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने की तैयारियां चल रही हैं। लखनऊ भी योग दिवस मनाने को तैयार है। हर गली, हर पार्क में योगाभ्यास चल रहे हैं।
योग दिवस
- फोटो : amar ujala
योग एक ऐसी तकनीक है, जो हमारे शरीर, मन और आत्मा को एक करती है। यह हमारे अंदर से तनाव और कुंठा को दूर करती है। जब हम सामान्य श्वांस की तकनीकों, ध्यान, प्राणायाम और कसरत करते हैं तो यह सब हमारे शरीर व मन को अंदर से खुश और अच्छा रखने के लिए प्रेरित करते हैं।
रेनू प्रकाश, नेचर लवर एंड बोनसाई आर्टिस्ट
- फोटो : amar ujala
योग से मिलती आध्यात्मिक ऊर्जा
15 साल से नियमित योग साधना कर रही हूं। जिम कभी नहीं गई। स्वामी रामदेव जी की प्रेरणा ने योग से जुड़ने केलिए प्रेरित किया। गर्व महसूस होता है कि जब पूरा विश्व 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाता है। जहां तक सवाल यह है कि योग क्या है हमारे लिए? तो मैं कहूंगी कि किसी के लिए योग वजन घटाने का जरिया हो सकता है, लेकिन मेरे लिए साधना है योग। ग्रुप में योग करने से एक -दूसरे को देखकर प्रेरणा मिलती है। यह बात अलग है कि मैं काम की व्यस्तता के बीच लोगों को जॉइन नहीं कर पाती हूं और अकेले ही करती हूं। योग करके, इससे जुड़कर देखिए, यह आपको सकारात्मक सौंदर्य से भर देगा। मुझे जब भी मौका मिलता है, हरिद्वार कैंप में हिस्सा लेने चली जाती हूं।
रेनू प्रकाश, नेचर लवर एंड बोनसाई आर्टिस्ट
15 साल से नियमित योग साधना कर रही हूं। जिम कभी नहीं गई। स्वामी रामदेव जी की प्रेरणा ने योग से जुड़ने केलिए प्रेरित किया। गर्व महसूस होता है कि जब पूरा विश्व 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाता है। जहां तक सवाल यह है कि योग क्या है हमारे लिए? तो मैं कहूंगी कि किसी के लिए योग वजन घटाने का जरिया हो सकता है, लेकिन मेरे लिए साधना है योग। ग्रुप में योग करने से एक -दूसरे को देखकर प्रेरणा मिलती है। यह बात अलग है कि मैं काम की व्यस्तता के बीच लोगों को जॉइन नहीं कर पाती हूं और अकेले ही करती हूं। योग करके, इससे जुड़कर देखिए, यह आपको सकारात्मक सौंदर्य से भर देगा। मुझे जब भी मौका मिलता है, हरिद्वार कैंप में हिस्सा लेने चली जाती हूं।
रेनू प्रकाश, नेचर लवर एंड बोनसाई आर्टिस्ट
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प्रभा सिंह, योगा इंस्ट्रक्टर
- फोटो : amar ujala
तीन गंभीर बीमारियों से मिली निजात
योग मेरे लिए एक दवा है, जिसने लिवर सिरोसिस, पैरालिसिस और कैंसर जैसी बीमारियों से मुझे बचाया। यूं तो योग करने की आदत युवावस्था से ही है, लेकिन बीमारी से छुटकारा मिलना यानी मेरा नया जन्म था। उसके बाद मैंने तय कर लिया कि योग का प्रचार-प्रसार करना है। स्वामी चिन्मयानंद जी से मैंने योग साधना सीखी और फिर इंस्ट्रक्टर बन गई। पिछले 35 साल से योग करती आ रही हूं। पहले बच्चे छोटे थे तो उतना समय नहीं दे पाती थी। दरअसल मेरी बीमारी को ठीक करने में जितना योगदान दवाओं का है, उतना ही योग का भी है। इसे यदि कुशल प्रशिक्षक के नेतृत्व में किया जाए तो असाध्य बीमारी भी ठीक हो सकती है। मेरा मानना है कि योग के लिए एक दिन का इंतजार क्यों, आप भी आज से ही शुरू कर दीजिए।
प्रभा सिंह, योगा इंस्ट्रक्टर
योग मेरे लिए एक दवा है, जिसने लिवर सिरोसिस, पैरालिसिस और कैंसर जैसी बीमारियों से मुझे बचाया। यूं तो योग करने की आदत युवावस्था से ही है, लेकिन बीमारी से छुटकारा मिलना यानी मेरा नया जन्म था। उसके बाद मैंने तय कर लिया कि योग का प्रचार-प्रसार करना है। स्वामी चिन्मयानंद जी से मैंने योग साधना सीखी और फिर इंस्ट्रक्टर बन गई। पिछले 35 साल से योग करती आ रही हूं। पहले बच्चे छोटे थे तो उतना समय नहीं दे पाती थी। दरअसल मेरी बीमारी को ठीक करने में जितना योगदान दवाओं का है, उतना ही योग का भी है। इसे यदि कुशल प्रशिक्षक के नेतृत्व में किया जाए तो असाध्य बीमारी भी ठीक हो सकती है। मेरा मानना है कि योग के लिए एक दिन का इंतजार क्यों, आप भी आज से ही शुरू कर दीजिए।
प्रभा सिंह, योगा इंस्ट्रक्टर
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मुकेश सिंह, दूरदर्शनकर्मी
- फोटो : amar ujala
100 किलो का था, 25 किलो कम किया वजन
जनेश्वर मिश्र पार्क में सुबह पांच बजे पहुंच जाता हूं। आधा घंटे के भीतर 20-25 लोग जुट जाते हैं और शुरू हो जाती है क्लास। दरअसल मेरा वजन 100 किलो हो गया था। पहले मैंने टहलना शुरू किया था। वहां हमारे उत्तराखंड वाले गुरुजी मिले और उनसे मैंने योग सीखना शुरू किया। देखते ही देखते मेरा वजन 25 किलो तक कम हो गया। यह मेरे लिए जादू से कम नहीं था। बस उसी समय प्रण कर लिया कि अब लोगों को योग करने के लिए प्रेरित करना है। कोशिश रंग लाई और धीरे-धीरे लोग योग के लिए आने लगे। कोई भी दिन ऐसा नहीं जब सुबह योग क्लास न चलती हो।
मुकेश सिंह, दूरदर्शनकर्मी
जनेश्वर मिश्र पार्क में सुबह पांच बजे पहुंच जाता हूं। आधा घंटे के भीतर 20-25 लोग जुट जाते हैं और शुरू हो जाती है क्लास। दरअसल मेरा वजन 100 किलो हो गया था। पहले मैंने टहलना शुरू किया था। वहां हमारे उत्तराखंड वाले गुरुजी मिले और उनसे मैंने योग सीखना शुरू किया। देखते ही देखते मेरा वजन 25 किलो तक कम हो गया। यह मेरे लिए जादू से कम नहीं था। बस उसी समय प्रण कर लिया कि अब लोगों को योग करने के लिए प्रेरित करना है। कोशिश रंग लाई और धीरे-धीरे लोग योग के लिए आने लगे। कोई भी दिन ऐसा नहीं जब सुबह योग क्लास न चलती हो।
मुकेश सिंह, दूरदर्शनकर्मी