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विवाद के 25वें साल क्या चाहती है अयोध्या, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट
Wed, 07 Dec 2016 11:08 PM IST
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 07 Dec 2016 11:08 PM IST
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
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विवादित ढांचा विध्वंस के 25वें साल अयोध्या क्या चाहती है? मंदिर या मस्जिद। नहीं... या फिर कुछ और...। पढ़ें इस ग्राउंड रिपोर्ट में?
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कोहरे की चादर में सिमटी अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि से महज दो सौ मीटर दूर सुटेहटी मोहल्ले में गरीबुल निशां और उनकी बेटी नाजरा बानो फूलों की मालाएं तैयार कर रही हैं। ये मालाएं हनुमान गढ़ी जानी है। उनके बराबर में कासिम के घर प्रसाद के लिए गत्ते के डिब्बे तैयार हो रहे हैं। ये भी हनुमान गढ़ी जाएंगे। गरीबुल निशां ही नहीं, ऑटो चलाने वाले उनके शौहर हाशिम भी खुश है कि माहौल अच्छा है, श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ी हुई है। मंदिर में चढ़ने वाली फूल-मालाओं से उनके परिवार को अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। (राम की पैढ़ी का एक दृश्य।)
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6 दिसंबर की पूर्व संध्या पर यह हाल उसी अयोध्या का है, जहां कभी दिसंबर का महीना आते-आते मंदिरों, बाजारों में सन्नाटा पसरने लगता था। जगह-जगह बैरियर गिर जाते थे, अर्धसैनिक बलों का फ्लैग मार्च सन्नाटा तोड़ता था। विवादित ढांचा विध्वंस के 25वें साल में राम की नगरी बदली-बदली सी है।
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सरयू के घाटों पर रौनक है, कई दिनों से राम विवाहोत्सव के आयोजनों के चलते चहल-पहल आम दिनों से कहीं ज्यादा है। रामायण मेले के आयोजन का पूरे अयोध्या में लाउडस्पीकर लगाकर प्रसारण हो रहा है। विवाद के पुराने दौर को भूलकर लोग आगे बढ़ने को तैयार हैं। उनका दर्द है तो विकास की अनदेखी को लेकर।
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अयोध्या के मंदिरों में पूजा पाठ, सरयू स्नान के साथ ही 6 दिसंबर को शौर्य दिवस और यौम-ए-गम के आयोजन होंगे, लेकिन सिर्फ रस्म अदायगी के लिए। शहर के लोगों का अब इनसे ज्यादा जुड़ाव नहीं लगता। ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ और यौम-ए-गम के उद्घोष नहीं सुनाई दे रहे। आम लोग, बाहरी श्रद्धालु मेलों, आयोजनों में बेरोकटोक आ-जा रहे हैं। स्कूल, कॉलेजों की बंदी के आदेश नहीं हैं।
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