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विवेक हत्याकांड में चश्मदीद के बयान बदलने से जांच टीम की मुश्किलें बढ़ी, पर पुलिस का गंदा खेल उजागर

Wed, 03 Oct 2018 12:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 03 Oct 2018 12:22 PM IST
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eye witness statement creates problem for police in vivek tiwari murder case.
- फोटो : amar ujala

विवेक तिवारी हत्याकांड की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी और उसकी पूर्व सहकर्मी बार-बार अपने बयान बदल रही है। उसके बयानों के आधार पर पुलिस कोई निष्कर्ष निकालने की कोशिश करती, इससे पहले ही दूसरा बयान सामने आ जाता है। इससे साफ है कि वह कन्फ्यूज है या डरी हुई हैं। या फिर कोई उस पर बयान बदलने का दबाव डाल रहा है। दो दिन पहले उसने पुलिस से डर लगने की बात कही थी।



पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूर्व सहकर्मी को उसके घर पर ही महिला सिपाहियों की नजरबंदी में रखा गया है। अधिकारी घंटों उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं। हो सकता है कि उस पर केस से हटने या उल्टे-सीधे बयान देने का दबाव डाला जा रहा हो। इस मामले में पुलिस की आरोपियों के प्रति नरमी और उन्हें बचाने के लिए कई तरह की साजिशों का खुलासा पहले ही हो चुका है। (क्राइम सीन पर चश्मदीद और पुलिसकर्मी।)

eye witness statement creates problem for police in vivek tiwari murder case.
विवेक हत्याकांड - फोटो : amar ujala

पहले कहा- चल रही थी कार, रीक्रिएशन में बोली, सड़क किनारे खड़ी थी
पूर्व सहकर्मी ने रीक्रिएशन के दौरान कार के सड़क किनारे खड़ी होने की बात कही। यह बयान पहले दिए गए बयानों से अलग था। वारदात के बाद उसने मीडिया को दिए बयान में कहा था कि विवेक उसे कार से घर छोड़ने जा रहा था, तभी घटना हुई। उस वक्त उसने कार के काफी धीमी गति से चलने की बात कही थी।

eye witness statement creates problem for police in vivek tiwari murder case.
- फोटो : amar ujala

.. तो एक्सीडेंट हुआ न ही कुचलने का प्रयास किया गया
विवेक की पूर्व सहकर्मी ने एसआईटी के अधिकारियों को घटना के बारे में जो जानकारियां दीं, उसमें कार के बाइक में टक्कर मारने और सिपाहियों को कुचलने के प्रयास की बात सामने नहीं आई। पूर्व सहकर्मी का कहना था कि कार खड़ी थी और बाइक सामने से आकर रुक गई। इसके बाद एक सिपाही उसकी तरफ व दूसरा विवेक की तरफ खिड़की पर आ गया। सिपाहियों ने गाली-गलौज की। विवेक ने विरोध किया तो वह भड़क गए और सामने जाकर गोली चला दी। इससे साफ है कि पुलिस के अधिकारी शुरुआत से ही सिपाहियों की बाइक को टक्कर मारने और उन्हें कुचलने की फर्जी कहानी गढ़ रहे थे।

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eye witness statement creates problem for police in vivek tiwari murder case.
- फोटो : amar ujala

तहरीर में खेल करने की भी खुली पोल
हत्याकांड की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी ने एफआईआर में लिखाया था कि उसने गोली चलने जैसी आवाज सुनी। यानी, उसने किसी को गोली चलाते नहीं देखा था। सिर्फ एक आवाज सुनी थी जिसे उसने फायर माना। गोली का अंदाजा उसे तब हुआ, जब मौके से भागे विवेक की कार कुछ दूर अंडरपास के खंभे से टकराकर रुकी। पूर्व सहकर्मी ने खून देखा तब उन्हें अहसास हुआ कि विवेक को गोली लगी है।

हालांकि, मंगलवार को रीक्रिएशन के दौरान उन्होंने सिपाही के सीधे कार के सामने खड़े होकर गोली मारने की जानकारी दी। इससे स्पष्ट है कि पूर्व सहकर्मी ने जो एफआईआर लिखाई थी, वह पुलिस अधिकारियों का खेल था। उस वक्त उसने कागज पर जो भी लिखा था, अधिकारियों के कहने पर लिखा था।

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विवेक हत्याकांड - फोटो : amar ujala

पिस्टल दोनों हाथों से पकड़ी थी या एक हाथ कलाई पर था
पूर्व सहकर्मी ने कहा था कि सिपाही ने दोनों हाथों से पिस्टल पकड़कर गोली चलाई थी। क्राइम सीन के रीक्रिएशन में भी सिपाही को इसी तरह से पिस्टल पकड़ने को कहा गया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं था कि पिस्टल को दोनों हाथों से पकड़ना था या एक हाथ से पिस्टल पकड़कर दूसरे हाथ से कलाई पकड़नी थी। हो सकता है कि इससे फायर का एंगल बदल जाता। पोस्टमार्टम के विशेषज्ञों का कहना था कि विवेक को लगी गोली ऊपर से नीचे की तरफ आई है। अगर दोनों हाथों से कार के सामने खडे़ होकर गोली चलाई गई तो ऊपर से नीचे का एंगल आना मुश्किल है।

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