विवेक हत्याकांड की जांच में आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार की वर्दी कई खुलासे कर सकती है। अगर वर्दी फटी हुई मिली या उसमें खून के एकाध निशान मिल गए तो साफ है कि विवेक के साथ सिपाहियों ने मारपीट भी की होगी। आपसी खींचतान में उनकी वर्दी फटी या खून के निशान पड़ गए होंगे।
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vivek tiwari
- फोटो : amar ujala
सिपाहियों ने वर्दी धो भी डाली होगी तो भी फोरेंसिक जांच में खून के निशान पकड़े जा सकते हैं। यह भी हो सकता है कि सिपाहियों ने वारदात के वक्त पहनी वर्दी नष्ट कर दी हो। कुछ भी हो, वर्दी मिलने पर इस जघन्य हत्याकांड की जांच की दिशा बदल सकती है। फिलहाल, आरोपी सिपाहियों की वर्दी जब्त न करना, एसआईटी की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।
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घटनास्थल पर जांच करती एसआईटी की टीम।
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विवेक तिवारी की जघन्य हत्या को दबाने में जुटे पुलिस अधिकारियों की तरह एसआईटी भी कदम दर कदम लापरवाही बरत रही है। अभी तक एसआईटी ने आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार की वारदात के वक्त पहनी गई वर्दी तक जब्त नहीं की है।
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विवेक तिवारी हत्याकांड को लेकर देशभर में गुस्सा
विवेक हत्याकांड को लेकर देशभर में सरगर्मी, खाकी के विरोध और मुख्यमंत्री से लेकर तमाम राजनीतिक दलों के सख्त रुख के बावजूद लखनऊ पुलिस बेपरवाह बनी हुई है। सबसे बड़ी लापरवाही एसआईटी की सामने आई है। शुक्रवार रात करीब दो बजे वारदात के बाद एसआईटी का नेतृत्व कर रहे आईजी रेंज सुजीत पांडे सोमवार को 36 घंटे बाद उस वक्त छानबीन करने पहुंचे थे, जब घटनास्थल से अधिकांश साक्ष्य नष्ट हो चुके थे।
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विवेक तिवारी
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उस वक्त वहां न ही सिपाहियों की बाइक थी न ही विवेक की कार। सड़क पर गिरा खून और टायर की रगड़ के निशान या तो हल्के पड़ चुके थे या फिर मिट चुके थे। इतना वक्त बीतने के बाद कार और बाइक से साक्ष्य मिटाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इससे साफ है कि एसआईटी ने घटनास्थल जाकर सिर्फ खानापूर्ति ही की।