आरामतलब जिंदगी बढ़ा रही किडनी की समस्या, विशेषज्ञों ने बताए महंगे इलाज से बचने के तरीके
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ओपीडी में आने वाले मरीजों में 50 फीसदी से ज्यादा ऐसे होते हैं जो लंबे समय से ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित होते हैं। ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित कर लिया जाए तो किडनी को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। हर व्यक्ति को छह माह में ब्लड प्रेशर व शुगर की जांच कराते रहना चाहिए। यदि ब्लड प्रेशर 120-90 से अधिक है तो चिकित्सक की सलाह लें। सालभर में कम से कम एक बार यूरिया क्रिएटिनिन की जांच जरूर कराएं।
खानपान का रखें ध्यान : कुछ लोग हर तरह के खाने में नमक का सेवन करते रहते हैं, जो नुकसानदेह है। महिलाओें को गर्भावस्था के दौरान खानपान का ध्यान नहीं रखने की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु को किडनी संबंधी समस्या होने का खतरा रहता है।
घर पर भी की जा सकती है ये डायलिसिस
डायलिसिस वाले मरीजों को पेरिटोनियल डायलिसिस (पीडी) से राहत मिल सकती है। खास बात है यह डायलिसिस घर पर की जा सकती है। इससे करीब 15 साल तक मरीज जिंदा रह सकते हैं। एसजीपीजीआई में अब तक 250 मरीजों पर यह प्रयोग किया गया है। सालभर में पीडी पर खर्च करीब दो हजार रुपये ही आता है। जबकि इतना खर्च तो हॉस्पिटल में कराए जाने वाले एक बार के हीमो डायलिसिस पर आ जाता है। कई मरीजों को तो हर हफ्ते हीमो डायलिसिस करानी पड़ती है।
पेरिटोनियल डायलिसिस है क्या
डॉ. अिमत गुप्ता ने बताया, किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करा पाने वाले घर बैठे एक सहयोगी की मदद से डायलिसिस कर सकते हैं। इसमें मरीज के पेट में करीब 10 सेमी. की कैथेटर ट्यूब लगा दी जाती है। इससे पेरिटोनियल डायलिसिस फ्लूइड (पीडीएफ) जोड़ दिया जाता है। इससे शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ एवं यूरिया पानी के साथ फिल्टर होकर निकलता रहता है। करीब छह माह में कैथेटर को बदल दिया जाता है।
बीपीएल मरीजों को मुफ्त इलाज
डॉ. गुप्ता ने कहा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से यह बीपीएल मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसमें पेरिटोनियल डायलिसिस को शामिल कर लिया जाए तो गंभीर मरीजों को राहत मिलेगी।
डायलिसिस के बाद मरीज को डाइट में अधिक प्रोटीन की जरूरत होती है। कई मरीज अज्ञानता में प्रोटीन कम कर देते हैं। इससे मरीज अचानक कमजोर हो जाता है। डायलिसिस वाले मरीजों का डाइट चार्ट तैयार कराना चाहिए और उसके वजन और किडनी की स्थिति के अनुसार प्रोटीन की मात्रा निर्धारित करानी चाहिए। खानपान में पौष्टिक चीजें लेते रहना चाहिए।
बचाव के लिए रखें ध्यान : किडनी की बीमारी से बचने के लिए कम से कम सालभर में एक बार पेशाब की जांच कराएं। इसमें देखें कि प्रोटीन या लाल रक्तकण तो नहीं आ रहे हैं।
एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं, लेकिन विभिन्न शोध रिपोर्र्ट में यह बात साबित हो चुकी है कि ये ड्रिंक्स किडनी पर असर डालते हैं। अल्कोहल का अत्यधिक सेवन भी रक्त को छानने की प्रक्रिया काफी गहरा असर डालता है। यह किडनी फेल होने का एक बड़ा कारण है। लोगों को यह ध्यान देना चाहिए कि किडनी में बीमारियों की शुरुआत एक दम से नहीं होती है। किडनी से जुडी बीमारियां धीरे-धीरे आती हैं। इसलिए अल्कोहल युक्त पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।