करीब 50 प्रतिशत महिलाएं प्रसव के बाद का दर्द झेलती हैं। इसमें गर्भ की थैली, ब्लैडर अपने तय स्थान से नीचे आ जाते हैं। इससे असहनीय दर्द होता है। महिलाएं शर्म की वजह से इसे छिपाती हैं। महज एक प्रतिशत महिलाएं ही उपचार कराती हैं। प्रसव के एक महीने बाद यह पीड़ा होती है। यह बात ऑस्ट्रेलिया से आए डॉ. अजय राणे ओम ने कही। वह स्मृति उपवन में चल रहे 63वीं ऑल इंडिया कांग्रेस ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी (एआईसीओजी 2020) के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को अपनी बात रख रहे थे।
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डॉ. अजय ने कहा कि इस समस्या से बचने के लिए महिलाओं को कसरत करनी चाहिए। पेल्विक मसल्स एक्सरसाइज से करीब 30 फीसदी महिलाएं ठीक हो जाती हैं। बाकी की 70 फीसदी की सर्जरी करनी पड़ती है। डिलीवरी के समय 12 घंटे से ज्यादा लेबर पेन नहीं सहना चाहिए। अगर 12 घंटे से ज्यादा समय तक नॉर्मल डिलीवरी न हो तो सिजेरियन कराना चाहिए। इसके अलावा सोनोग्राफी के दौरान शिशु का वजन तीन-चार किलो हो तो सिजेरियन को प्राथमिकता दें।
एआईसीओजी की आयोजक सचिव डॉ. प्रीती कुमार ने सेफ मदरहुड कमिटी पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में महिला को 75 ग्राम ग्लूकोज पिलाने के बाद शुगर की जांच की जाती है। उस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का इलाज किया जाता है। डॉ. प्रीती ने ब्लीडिंग रोकने में कारगर तकनीक पोस्टपार्टम हेमरेज पर भी चर्चा की। इसमें बैलून तकनीक से ब्लीडिंग को रोकते हैं। डॉ. प्रीती ने जंक फूंड के दुष्प्रभाव से भी सतर्क किया।
युवतियों में भी मिनोपॉज की समस्या
मुंबई से आईं रिश्मा ढिल्लन पाई ने बताया कि अब 18 से 25 वर्ष की युवतियों में अंडा कम बनने की शिकायत आ रही है, जबकि आमतौर पर यह स्थिति 45 साल की उम्र के अधिक महिलाओं में देखने को मिलती थी। इसके लिए एंटी मलेरियन हार्मोन ब्लड जांच होती है, जिसमें अंडों की सटीक जानकारी मिलती है। समय पर उपचार से युवतियों को बांझपन जैसी समस्या को कम किया जा सकता है।
थायरॉयड से मां के साथ शिशु को भी होता है खतरा
लखनऊ की डॉ. निधि जौहरी ने बताया कि थायरॉयड हार्मोन कम होने से करीब 33 फीसदी महिलाएं हाइपो थॉयरायड की चपेट में आ आती हैं। इस हालत में गर्भधारण में दिक्कत आती है। पहली तिमाही में गर्भपात ही हो जाता है। बच्चे को मानसिक और शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं। मा-बच्चे दोनों को खतरा हो सकता है। वहीं हाइपर थायरॉयड में हार्मोन बढ़ जाते हैं। इससे बीपी बढ़ जाती है। पसीना आने लगता है। दिल की बीमारियां बढ़ जाती हैं। आंखों में सूजन आ जाती है।