आयुष चिकित्सकों को सर्जरी का अधिकार देने के सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडिया मेडिसिन के नोटिफिकेशन के बाद से चिकित्सक दो खेमों में बंट गए हैं। एलोपैथी चिकित्सक इसके विरोध में उतर आए हैं। उनका तर्क है कि मिक्सोपैथी (चिकित्सा विधाओं को आपस में मिलाना) के नतीजे बेहद भयावह होंगे। मरीजों का जीवन खतरे में पड़ेगा। ...तो मॉडर्न चिकित्सा व्यवस्था पर भी मिक्सोपैथी से बुरा प्रभाव पड़ेगा। तो दूसरी तरफ आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सक हैं जो नोटिफिकेशन को जायज ठहरा रहे हैं। आयुर्वेद के चिकित्सकों का कहना है कि सर्जरी की विधा प्राचीन सुश्रुत संहिता में शामिल है। उनकी दलील ये भी है कि जब एलोपैथ के चिकित्सक भी महर्षि सुश्रुत को सर्जरी का जनक मानते हैं तो उन्हें इस विधा से कैसे दूर रखा जा सकता है? वहीं यूनानी के चिकित्सकों का भी दावा है कि उन्हें सर्जरी पढ़ाई जाती है इसलिए उन्हें हक दिया जाना जायज कदम है। बहरहाल मरीजों को तय करना है कि उन्हें किस चिकित्सा पद्धति पर भरोसा है और कहां इलाज कराना चाहते हैं। पेश है पूरे हालात को बयां करती एक रिपोर्ट...
सर्जरी के अधिकार पर क्यों है रार, पेश है पूरे हालात को बयां करती एक रिपोर्ट...
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एलोपैथिक चिकित्सकों का कहना है कि बिना प्रॉपर टीचिंग और ट्रेनिंग के की गई सर्जरी से चिकित्सा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। मरीजों की जान को खतरा रहेगा। उनका यह भी सवाल है कि जब सर्जरी का अधिकार आयुष को मिल जाएगा तो मेडिकल छात्र एलोपैथ में कड़ा प्रशिक्षण क्यों लेंगे?
- आयुष क्या है?
आयुर्वेद, योगा, नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी को मिलाकर आयुष कहते हैं। इन पद्धतियों की वैधानिक संस्था सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (स्नातकोत्तर आयुर्वेद शिक्षा) होती है।
- क्या कहा गया नोटिफिकेशन में?
सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन ने गत 20 नवंबर को एक अधिसूचना जारी की। आयुर्वेद के डॉक्टर भी अब जनरल और ऑर्थोपेडिक सर्जरी के साथ आंख, नाक, कान और गले की भी सर्जरी कर सकेंगे। दरअसल भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (स्नातकोत्तर आयुर्वेद शिक्षा) विनियम, 2016 में संशोधन किया गया। इसके तहत कुल 58 प्रकार की सर्जरी की मंजूरी दी गई। इसमें 39 जनरल सर्जरी हैं जिन्हें आयुर्वेद की शल्य तंत्र श्रेणी में 39 जनरल सर्जरी तो शालाक्य तंत्र श्रेणी में 19 शामिल हैं।
- शल्य और शालाक्य तंत्र क्या है?
शल्य तंत्र (सर्जरी): वे बीमारियां जिनमें सर्जरी की जरूरत होती है। मसलन भगंदर, बवासीर आदि।
शालाक्य तंत्र (ईएनटी) : आंख, नाक, कान, मुंह, गला आदि से संबंधित रोग।
- साधारण शब्दों में कहें तो किन सर्जरी का अधिकार इससे मिला?
आंख, नाक, कान और गला, दांत की सर्जरी, स्किन ग्राफ्टिंग, ट्यूमर की सर्जरी, हाइड्रोसील, अल्सर, पेट की, स्तन की गांठों, अल्सर, मूत्र मार्ग के रोगों, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद हटाने और कई अन्य प्रकार की सर्जरी करने का अधिकार मिला है।
- कौन सर्जरी कर सकेेगा?
बीएएमएस आयुर्वेद डॉक्टर स्नातक यूजी डिग्री के बाद आयुर्वेद में तीन वर्षीय स्नातकोतर पीजी डिग्री आयुर्वेद एमएस शल्य ( जनरल सर्जरी), शालाक्य (ईएनटी एवं डेंटिस्ट्री ) और स्त्री रोग और प्रसूति तंत्र (गायनेकोलॉजी) होंगे वे सर्जरी कर सकेंगे।
- क्या अधिकार के साथ शिक्षण व्यवस्था में भी बदलाव किए जाएंगे?
हां। पाठ्यक्रम में सर्जिकल प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल को जोड़ा गया है।
कहा जा रहा है इसका गजट नोटिफिकेशन सरकार सात नवंबर 2016 को कर चुकी है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद की पहचान बनेगी। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा मिलेगा। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर आयुर्वेद अध्ययन के पाठ्यक्रम में संशोधन कर भारतीय चिकित्सा परिषद् संशोधन विनियम 2020 जारी कर आयुर्वेद चिकित्सकों को भी एलोपैथी चिकित्सकों के समान सर्जरी करने का अधिकार दिया है।
एलोपैथ
एमबीबीएस के बाद मास्टर ऑफ सर्जरी और मास्टर ऑफ मेडिसिन की पढ़ाई होती है। एमएस अंतिम वर्ष के छात्रों को सर्जरी की इजाजत तभी दी जाती है जब वे पूरी तरह से पारंगत हो जाते हैं। इसके बाद यह विभिन्न तरह की सर्जरी कर सकते हैं। मास्टर ऑफ सर्जरी की डिग्री लेने वाले सर्जन इसके बाद नीट सुपर स्पेशियलिटी की परीक्षा देकर सर्जरी की विभिन्न विभागों में अलग-अलग प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।
आयुर्वेद
राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट के रूप में सर्जरी के भी कोर्स चल रहे हैं। बीएचयू वाराणसी, एएमयू अलीगढ़, महाराष्ट्र और बेंगलूरू के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों में पीजी सर्जरी की पढ़ाई होती है। यह कोर्स शल्य एवं शालाक्य के हैं। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से पढ़ाई पूरी करने वालों को छह माह तक एलोपैथ का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
यूनानी
यूनानी में सर्जरी विभाग को जराहत कहा जाता है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, पुणे, बेंगलूरू स्थित यूनानी मेडिकल कॉलेजों में पीजी का यह कोर्स चल रहा। इसका कोर्स तय है। इसमें सामान्य किस्म की बाह्य सर्जरी के साथ हड्डी, अल्सर, अपेंडिक्स की सर्जरी सिखाई जाती है। सुपर स्पेशियलिटी वाली सर्जरी नहीं करते हैं।